रांची |
झारखंड में लोगों का खान-पान पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। सांख्यिकी मंत्रालय के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2024-25 में झारखंड का एक परिवार औसतन ₹7,260 प्रति माह भोजन पर खर्च कर रहा है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफ़ी अधिक है।
तीन साल में बढ़ा खर्च
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में राशन और भोजन पर खर्च में हर साल इजाफा हुआ है—
- 2022-23 : ₹5,393 प्रति माह
- 2023-24 : ₹5,455 प्रति माह
- 2024-25 : ₹7,260 प्रति माह
यानी सिर्फ एक साल में ही करीब ₹1,800 से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
देश के अन्य राज्यों से तुलना
खान-पान पर खर्च के मामले में झारखंड देश में नीचे से दूसरे स्थान पर है। सबसे कम खर्च उत्तर प्रदेश में दर्ज किया गया है।
कुछ राज्यों में औसत मासिक खर्च—
- हिमाचल प्रदेश : ₹11,230
- जम्मू-कश्मीर : ₹9,020
- पंजाब : ₹11,352
- केरल : ₹10,010
- महाराष्ट्र : ₹9,900
- छत्तीसगढ़ : ₹8,030
- दिल्ली : ₹14,124
- उत्तराखंड : ₹9,570
- असम : ₹7,920
- सिक्किम : ₹9,790
- पश्चिम बंगाल : ₹8,800
- तेलंगाना : ₹9,570
- आंध्र प्रदेश : ₹9,240
- मध्य प्रदेश : ₹7,920
- गोवा : ₹11,660
- चंडीगढ़ : ₹14,850
वहीं झारखंड में यह खर्च ₹7,260 है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि समय के साथ खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसी कारण 2025 के लिए उपभोग व्यय का अनुमान बढ़कर सामने आया है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
“यदि 2023-24 में एक परिवार ₹5,455 खर्च कर रहा था, तो महंगाई के कारण 2024-25 में उसी स्तर का उपभोग करने पर खर्च बढ़ना स्वाभाविक है।”
उत्तर और दक्षिण भारत में फर्क
सर्वे में यह भी सामने आया है कि—
- उत्तर भारत के राज्यों में खान-पान पर खर्च अपेक्षाकृत कम
- दक्षिण भारत के राज्यों में खर्च अधिक
यह फर्क आय, खान-पान की आदतों और जीवनशैली के कारण माना जा रहा है।
झारखंड में खान-पान पर खर्च बढ़ना यह दिखाता है कि —
- महंगाई का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है
- कम आय वाले राज्य होने के बावजूद खर्च तेजी से बढ़ा है
- भविष्य में खाद्य सुरक्षा और सब्सिडी योजनाओं पर दबाव बढ़ सकता है
यह रिपोर्ट नीति निर्धारकों के लिए चेतावनी और दिशा दोनों है।
