झारखंड के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल सूरजकुंड में वर्ष 2026 में सूरजकुंड मेला इस बार पूरे 15 दिनों तक आयोजित किया जा रहा है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर शुरू होने वाला यह मेला 14 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर लगभग 28 जनवरी 2026 तक चलेगा।
मेले का उदघाटन में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, विधायक अमित कुमार यादव, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव शामिल होंगे। मेले को लेकर क्षेत्र में उत्सव का माहौल है।
मेला कब से कब तक रहेगा
- शुरुआत: 14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति)
- अवधि: 15 दिन
- संभावित समापन: 28 जनवरी 2026
हर वर्ष की तरह इस बार भी मेला कई दिनों तक चलेगा, ताकि दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक आसानी से सूरजकुंड पहुंच सकें।
उद्घाटन और विशेष कार्यक्रम
इस 15 दिवसीय सूरजकुंड मेले का औपचारिक उद्घाटन बुधवार को किया गया। उद्घाटन समारोह में कई जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही। वहीं 20 जनवरी 2026 से मेला परिसर में नवनिर्मित पार्क भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोला जाएगा, जो इस बार का एक बड़ा आकर्षण माना जा रहा है।
क्यों इतना प्रसिद्ध है सूरजकुंड मेला
सूरजकुंड मेला झारखंड का दूसरा सबसे बड़ा मेला माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान यहां स्थित प्राकृतिक गर्म जल कुंड है। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से त्वचा रोग सहित कई बीमारियों में लाभ मिलता है। मकर संक्रांति के दिन हजारों श्रद्धालु यहां स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं।
यही धार्मिक आस्था और प्राकृतिक विशेषता सूरजकुंड को सालों से श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बनाती है।
आस्था के साथ मिलता है सुकून
श्रद्धालुओं का कहना है कि सूरजकुंड में स्नान के बाद उन्हें शारीरिक और मानसिक सुकून मिलता है। पहाड़ों से घिरा शांत वातावरण, कुंड का गर्म जल और भक्तिमय माहौल लोगों को रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर एक अलग ही अनुभव देता है।
मेले में क्या-क्या है खास
इस बार मेले में मनोरंजन और सुविधाओं के कई नए इंतज़ाम किए गए हैं—
- झूले और खेल-तमाशे
- ब्रेक डांस, ड्रैगन ट्रेन और अन्य मनोरंजन साधन
- बच्चों और परिवारों के लिए विशेष आकर्षण
- स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण बाज़ार की दुकानें
मेले में लगे ये आकर्षण न सिर्फ बच्चों बल्कि युवाओं और परिवारों के लिए भी खास केंद्र बने हुए हैं।
झारखंड ही नहीं, कई राज्यों से आते हैं लोग
सूरजकुंड मेले में झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा समेत कई राज्यों से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। मकर संक्रांति के दिन यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में बदल जाता है।
संस्कृति, परंपरा और पर्यटन का संगम
विख्यात सूरजकुंड मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान भी है। यह मेला स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का साधन है और पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
15 दिनों तक चलने वाला यह मेला हर साल की तरह इस बार भी आस्था, संस्कृति और सुकून का अनोखा संगम पेश कर रहा है।
