झारखंड में आयोजित सीजीएल (Combined Graduate Level) परीक्षा से जुड़े पेपर लीक विवाद में बड़ी कार्रवाई की गई है। एसआईटी (विशेष जांच दल) ने प्रशासनिक पद पर कार्यरत अधिकारी संतोष मस्ताना को अफवाह फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन पर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बिना प्रमाण के पेपर लीक की भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप है।
क्या है पूरा मामला?
- सीजीएल परीक्षा के प्रश्नपत्र के लीक होने की अफवाह सोशल मीडिया पर तेजी से फैली।
- एसआईटी की जांच में ये दावे गलत और भ्रामक पाए गए।
- अधिकारियों ने बताया कि संतोष मस्ताना ने पेपर लीक का दावा किया, लेकिन उसके समर्थन में कोई वैध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।
अधिकारियों की कार्रवाई
एसआईटी ने वीडियो और डिजिटल सामग्री के आधार पर संतोष मस्ताना के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच दल का कहना है कि भ्रामक जानकारी फैलाने से अभ्यर्थियों में असंतोष और परीक्षा की विश्वसनीयता पर असर पड़ा। न्यायालय में पेश करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है।
विपक्ष का बयान
झारखंड भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा:
“सरकार असली किंगपिन को बचा रही है और उन लोगों पर कार्रवाई कर रही है, जो पेपर लीक की अनियमितताओं पर आवाज उठा रहे थे। यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई हो सकती है।”
आगे क्या?
- एसआईटी इस मामले में और साक्ष्य जुटा रही है।
- अदालत में अगली सुनवाई में यह तय होगा कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
- अभ्यर्थी पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
मुख्य तथ्य एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| आरोपी | संतोष मस्ताना (प्रशासनिक पदाधिकारी) |
| आरोप | सीजीएल पेपर लीक की झूठी अफवाह फैलाना |
| कार्रवाई | एसआईटी द्वारा गिरफ्तारी, न्यायिक हिरासत |
| विपक्ष की प्रतिक्रिया | सरकार पर किंगपिन को बचाने का आरोप |
| वर्तमान स्थिति | जांच जारी, अभ्यर्थियों में रोष |
निष्कर्ष
CGL पेपर लीक विवाद अब सिर्फ परीक्षा की विश्वसनीयता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन चुका है। जहां सरकार इसे कानून व्यवस्था का हिस्सा बता रही है, वहीं विपक्ष इसे “सत्य को दबाने की कोशिश” करार दे रहा है। अब सबकी निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट और अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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