रांची।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार की दो अलग-अलग टीमें इस महीने दावोस (स्विट्जरलैंड) और लंदन (यूके) के दौरे पर जाएंगी। इस विदेश दौरे का उद्देश्य झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक संभावनाओं और निवेश के अवसरों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।
18 जनवरी को दावोस रवाना होगी पहली टीम
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम 18 जनवरी को दावोस के लिए रवाना होगी। यह टीम वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में हिस्सा लेगी, जहां झारखंड में निवेश, उद्योग, खनन, ऊर्जा और विकास से जुड़े विषयों पर वैश्विक विशेषज्ञों और निवेशकों से बातचीत की जाएगी।
मुख्यमंत्री स्वयं इस टीम का नेतृत्व करेंगे और झारखंड को निवेश के नए केंद्र के रूप में प्रस्तुत करेंगे। दावोस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री कई महत्वपूर्ण बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
लंदन के लिए जाएगी दूसरी टीम
वहीं, मंत्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में आठ सदस्यीय दूसरी टीम लंदन के लिए रवाना होगी। यह टीम 19 जनवरी को लंदन पहुंचेगी और वहां विभिन्न बैठकों, राउंड टेबल चर्चाओं और कार्यक्रमों में भाग लेगी।
22 जनवरी को लंदन में राउंड टेबल मीटिंग
22 जनवरी को लंदन में शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को लेकर राउंड टेबल मीटिंग आयोजित की जाएगी। इसके बाद एनर्जी स्टोरेज और अन्य तकनीकी विषयों पर भी चर्चा होगी।
23 और 24 जनवरी को Jharkhand@25 कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें झारखंड के विकास मॉडल, निवेश नीति और भविष्य की योजनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा जाएगा।
मेगालिथ को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की पहल
इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की धरती पर मौजूद प्राचीन मेगालिथ (पत्थर संरचनाएं) केवल पत्थर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की ऐतिहासिक धरोहर हैं। सरकार इन मेगालिथ को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह झारखंड और भारत के लिए गर्व की बात होगी और इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
दोनों टीमों में शामिल प्रमुख अधिकारी
दावोस और लंदन जाने वाली दोनों टीमों में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक कल्पना सोरेन, मुख्य सचिव, वित्त सचिव, उद्योग सचिव, पर्यटन सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। ये सभी अधिकारी अलग-अलग क्षेत्रों में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे।
झारखंड को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिश
सरकार का कहना है कि इस विदेशी दौरे का मुख्य उद्देश्य झारखंड को निवेश, उद्योग, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाना है। साथ ही राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जाएगा।
