गिरिडीह सहित 19 जिलों में 461 नये स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाए जायेंगे, क्या इससे बदलेगी झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर ?

4 Min Read
गिरिडीह सहित 19 जिलों में 461 नये स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाए जायेंगे, क्या इससे बदलेगी झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर ? (Dumri Express)

रांची।
झारखंड सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बड़ी योजना को मंजूरी दी है। गिरिडीह समेत राज्य के 19 जिलों में कुल 461 नये स्वास्थ्य उपकेंद्रों के निर्माण का फैसला लिया गया है। यह निर्माण कार्य 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि से किया जाएगा। सवाल यह है कि क्या केवल भवन बनने से झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बदल पाएगी?

यह फैसला राज्य स्तरीय समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने की।

क्यों जरूरी थे नये स्वास्थ्य उपकेंद्र?

अब तक झारखंड के अधिकांश गांवों में:

  • स्वास्थ्य उपकेंद्र किराये के मकानों में चल रहे है
  • कई जगहों पर पंचायत भवनों में अस्थायी व्यवस्था है
  • न प्रसव की सुविधा ठीक से है
  • न दवाइयों का भंडारण ठीक से है
  • न स्वास्थ्यकर्मियों के रहने की जगह है

इसका सीधा असर:

  • गर्भवती महिलाओं
  • नवजात शिशुओं
  • बुजुर्गों
  • और गरीब ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है

किन-किन जिलों में बनेंगे स्वास्थ्य उपकेंद्र

जिलास्वास्थ्य उपकेंद्र की संख्या
धनबाद120
गिरिडीह86
लोहरदग्गा6
रामगढ़17
ईस्ट सिंहभूम21
सिमडेगा4
गुमला14
हजारीबाग25
गोड्डा14
साहेबगंज22
चतरा15
देवघर16
जामताड़ा6
कोडरमा8
गढ़वा14
रांची38
दुमका16
सरायकेला5
लातेहार13

इन जिलों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का होगा निर्माण

जिलासामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की संख्या
धनबाद01
जामताड़ा04
गुमला13
चतरा01
लोहरदग्गा02
ईस्ट सिंहभूम08
खूंटी03
पलामू08
देवघर01
हजारीबाग01
सिमडेगा01
कोडरमा02
रामगढ़01
दुमका03
लातेहार02
गिरिडीह04
साहेबगंज01
वेस्ट सिंहभूम09

कुल मिलाकर 18 जिलों में सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नए भवन और
19 जिलों में स्वास्थ्य उपकेंद्रों का निर्माण किया जाएगा।

और भी खबरें पढ़े :

कब तक बनेंगे ये भवन?

सरकार के अनुसार:

  • अधिकांश भवन दो साल के भीतर तैयार हो जाएंगे
  • निर्माण ग्रामीण इलाकों में सरकारी भूमि पर किया जाएगा

कितना पैसा खर्च होगा?

  • यह पूरा प्रोजेक्ट 15वें वित्त आयोग की राशि से बनाया जाएगा
  • प्रत्येक उपकेंद्र पर करोड़ों रुपये का निवेश होगा
  • पैसा सीधे भवन, उपकरण, बिजली-पानी, स्टाफ सुविधाओं पर खर्च होगा

क्या बदलेगा, सिर्फ भवन या व्यवस्था भी?

सरकारी योजना के अनुसार नये स्वास्थ्य उपकेंद्रों में:

  • सुरक्षित प्रसव की सुविधा
  • गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच
  • टीकाकरण और नवजात शिशु देखभाल
  • प्राथमिक उपचार और जरूरी दवाइयां
  • स्वास्थ्यकर्मियों के लिए रहने की सुविधा

यदि ये सभी सुविधाएं पूरी क्षमता के साथ लागू होती हैं, तो गांव स्तर पर ही 60–70% स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान संभव है।

झारखंड में स्वास्थ्य ढांचे का इतिहास

  • झारखंड गठन (2000) के बाद लंबे समय तक
    स्वास्थ्य ढांचे पर ध्यान नहीं दिया गया
  • कई योजनाएं बनीं, लेकिन भवन निर्माण अधूरे रहे
  • पहली बार इतनी बड़ी संख्या में
    एक साथ 461 स्वास्थ्य उपकेंद्रों का निर्माण किया जा रहा है

क्या यह झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का टर्निंग पॉइंट बनेगा?

यदि सरकार:

  • समय पर निर्माण पूरा करे
  • पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति करे
  • दवा और उपकरणों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करे
  • और निगरानी व्यवस्था मजबूत बनाए

तो यह योजना झारखंड की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है

लेकिन यदि लापरवाही रही, तो यह भी पिछली कई योजनाओं की तरह कागजों में सिमट कर रह जाएगी

461 नये स्वास्थ्य उपकेंद्र झारखंड के लिए एक बड़ा अवसर हैं।
अब सवाल सरकार की नीयत, कार्यान्वयन और निगरानी पर टिका है।
इमारत बनेगी तो उम्मीद जगेगी, व्यवस्था सुधरी तो तस्वीर बदलेगी।

Share This Article
Pradeep Kumar is the Co-Founder of DumriExpress.com, a digital news platform. He extensively covers local news, latest updates, and trending stories, with a strong focus on Jharkhand and Bihar, along with National (Bharat), Politics, Technology, Sports, Entertainment, and International news.