रांची।
विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum – WEF) की वार्षिक बैठक में इस बार झारखंड समेत भारत के 10 राज्य भाग लेने जा रहे हैं। यह बैठक 19 से 23 जनवरी तक स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में आयोजित होगी। झारखंड पहली बार इस वैश्विक मंच पर औपचारिक रूप से भाग ले रहा है, जिसे राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
झारखंड@25 थीम पर होगा विशेष राजनीतिक कार्यक्रम
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल दावोस और लंदन की यात्रा करेगा। इस दौरान 22 जनवरी को लंदन में “झारखंड@25” थीम पर आधारित एक विशेष राजनीतिक स्वागत समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम झारखंड की पहचान, उसकी उपलब्धियों और वैश्विक स्तर पर राज्य के योगदान को प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
देश के 10 राज्यों की होगी भागीदारी
दावोस बैठक में जिन राज्यों की भागीदारी होगी, उनमें झारखंड के अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश और केरल शामिल हैं। बैठक में केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
आर्थिक प्राथमिकताओं और शासन सुधारों की होगी चर्चा
इस वैश्विक मंच पर भारत के राज्य अपनी-अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं, शासन सुधारों और विकास से जुड़ी योजनाओं की प्रस्तुति देंगे। झारखंड का प्रतिनिधिमंडल राज्य में हो रहे शासन आधारित विकास, संस्थागत क्षमता निर्माण, स्थिरता और दीर्घकालिक विकास के मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखेगा।
झारखंड के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़ा विशेष महत्व
यह भागीदारी झारखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर और भी खास मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि यह मंच झारखंड को वैश्विक निवेश, नीति संवाद और विकास साझेदारी के लिए मजबूत पहचान दिलाने में मदद करेगा।
किन मुद्दों पर होगी झारखंड की प्रस्तुति
झारखंड की भागीदारी मुख्य रूप से इन विषयों पर केंद्रित रहेगी—
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
- ऊर्जा सुरक्षा
- पर्यावरण संरक्षण
- वन एवं जैव-अर्थव्यवस्था
- महिला सशक्तिकरण
- सतत और समावेशी विकास
सरकार का उद्देश्य है कि झारखंड को न्यायसंगत विकास, संस्थागत पारदर्शिता और वैश्विक सहयोग के एक मजबूत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
वैश्विक स्तर पर झारखंड को मिलेगा मंच
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भागीदारी से झारखंड को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, नीति निर्माताओं और वैश्विक संस्थानों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिलेगा, जिससे राज्य के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
