बोकारो (झारखंड)।
हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर बोकारो जिले के फुसरो-पिछरी क्षेत्र में स्थित दामोदर नदी के बीचों-बीच हथिया पत्थर के पास भव्य हथिया पत्थर मेला आयोजित किया जाता है, जो राज्य के सबसे लोकप्रिय मेलों में से एक है। हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं और इस आयोजन को अपनी आस्था और परंपरा का अभिन्न हिस्सा मानते हैं।
हथिया पत्थर मेला कहाँ लगता है?
हथिया पत्थर मेला झारखंड के बोकारो जिले के फुसरो-पिछरी के पास दामोदर नदी के किनारे लगता है। नदी के बीचों-बीच स्थित विशाल पत्थर की आकृति कई लोगों को हाथी जैसा प्रतीत होती है, इसी कारण यह स्थल और मेला हथिया पत्थर के नाम से प्रसिद्ध है।
कब लगता है यह मेला?
इस मेला का आयोजन हर साल मकर संक्रांति के दिन किया जाता है। 2025 में यह मेला 14 जनवरी को आयोजित किया गया था।
क्यों प्रसिद्ध है हथिया पत्थर मेला?
इस मेला का महत्व सिर्फ उत्सव भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पौराणिक लोककथा भी जुड़ी है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में एक राजा अपनी बारात के साथ दामोदर नदी पार कर रहा था। नदी में खड़े पानी से बारात पार हो गई, लेकिन वापसी के समय राजा ने देवी-देवताओं को धन्यवाद देना छोड़ा। फलस्वरूप श्राप की वजह से राजा, बाराती, बने हाथी, घोड़ा और अन्य पात्रों सहित सभी पत्थर में बदल गए। आज भी नदी के बीच विभिन्न आकृतियों के पत्थर इसी कथा का प्रतीक हैं। श्रद्धालु इन्हें देखने और पूजने आते हैं।
विवरणों के अनुसार हथिया पत्थर मेले में लोग दामोदर नदी में स्नान करते हैं, स्थानीय देवी मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है।
- स्विट्ज़रलैंड और UK में झारखंड की महिलाओं की आवाज़ बनेंगी कल्पना सोरेन, 18 जनवरी को विदेश दौरे पर होंगी रवाना
- स्नातक कर रहे दिव्यांग छात्रों के लिए आधार कौशल स्कॉलरशिप, आवेदन प्रक्रिया शुरू
स्थानीय संस्कृति में हथिया पत्थर मेले का महत्व
हथिया पत्थर मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह लोक संस्कृति और सामाजिक मेल-जोल का बड़ा अवसर भी है। मेले में स्थानीय लोग पारंपरिक भोजन, खेल-कूद, झूले, स्थानीय हस्तशिल्प और भंडारे का आनंद लेते हैं। आसपास के ग्रामीण और शहरों से आए परिवार समेत सैंकड़ों लोग इस मेला का हिस्सा बनते हैं।
हथिया पत्थर मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय पर्यटन, संस्कृति और समुदाय को सकारात्मक पहचान देता है। स्थानीय लोग भी चाहते हैं कि इसे आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, क्योंकि इसकी ऐतिहासिकता, लोककथा और प्राकृतिक आकर्षण बोकारो की सांस्कृतिक धरोहर को और समृद्ध बना सकते हैं।
2026 में हथिया पत्थर मेला कब और कहाँ लगेगा?
इसवर्ष 2026 में यह मेला भी मकर संक्रांति पर 14 जनवरी 2026 को होगा। आयोजन स्थल फुसरो-पिछरी के दामोदर नदी के पास ही रहेगा।
जहां प्रतिवर्ष की भांति श्रद्धालु और पर्यटक दोनों भारी संख्या में शामिल होंगे। तैयारी भी पहले से शुरू हो जाती है ताकि श्रद्धालु सुचारु रूप से पूजा-अर्चना और मेला का आनंद ले सकें।


