रांची |
देशभर के स्कूलों में छात्राओं को Free sanitary pads उपलब्ध कराने को लेकर Supreme Court of India ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि menstrual health को “जीवन के अधिकार” का हिस्सा मानते हुए राज्य सरकारें स्कूलों में जरूरी सुविधाएँ सुनिश्चित करें। हालांकि, झारखंड में अभी यह व्यवस्था सीमित है और ज्यादातर सरकारी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मासिक धर्म स्वच्छता (menstrual hygiene) सिर्फ स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि गरिमा और शिक्षा से भी जुड़ा है। अदालत ने सभी राज्यों से तीन महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी है कि स्कूलों में छात्राओं के लिए सैनिटरी पैड, डिस्पोजल और जागरूकता कार्यक्रमों की क्या व्यवस्था है।
झारखंड की स्थिति: सिर्फ कस्तूरबा स्कूलों तक सीमित
झारखंड में फिलहाल यह सुविधा मुख्य रूप से Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya (KGBV) में पढ़ने वाली छात्राओं को मिल रही है। इन आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली लड़कियों को समय-समय पर सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाते हैं, लेकिन सामान्य सरकारी स्कूलों में ऐसी कोई व्यापक योजना लागू नहीं है।
जागरूकता पर भी जोर
अदालत ने यह भी कहा है कि सिर्फ पैड उपलब्ध कराना काफी नहीं, बल्कि स्कूलों में awareness programs चलाना भी जरूरी है। लड़कों और पुरुष शिक्षकों को भी इस विषय पर संवेदनशील बनाना होगा, ताकि छात्राओं को किसी प्रकार की झिझक या भेदभाव का सामना न करना पड़े।
तीन महीने में देनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे तीन महीने के भीतर यह बताएं कि:
- स्कूलों में सैनिटरी पैड की उपलब्धता
- डिस्पोजल सिस्टम
- हेल्थ एजुकेशन और जागरूकता कार्यक्रम
की क्या स्थिति है और आगे क्या योजना बनाई जा रही है।
क्यों है यह फैसला अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि सैनिटरी सुविधाओं की कमी के कारण कई छात्राएं हर महीने स्कूल नहीं जा पातीं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में यह फैसला लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसर के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि झारखंड समेत सभी राज्य स्कूलों में छात्राओं के लिए Free sanitary pads की व्यवस्था को प्राथमिकता देंगे, ताकि कोई भी लड़की सिर्फ संसाधनों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई से वंचित न रहे।
