Ranchi RIMS भूमि अतिक्रमण मामला: झारखंड हाइकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने और दोषी अफसरों से वसूली का दिया आदेश

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Ranchi RIMS की जमीन पर अतिक्रमण मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने, दोषी अधिकारियों पर FIR और ACB से जांच के निर्देश दिए हैं।

रांची |
RIMS (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) की जमीन पर हुए कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण के गंभीर मामले में Jharkhand High Court ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य प्रशासन को साफ संदेश दिया है कि लापरवाही, मिलीभगत और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाईकोर्ट ने इस मामले में न सिर्फ पीड़ितों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से ही यह राशि वसूली जाए। अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी समय रहते सतर्क होते, तो आम लोगों को इतना कष्ट नहीं झेलना पड़ता।

Jharkhand High Court का स्पष्ट आदेश

हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि—

  • दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए
  • एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) से जांच कराई जाए
  • जरूरत पड़ने पर सीबीआई जांच का विकल्प भी खुला रहेगा

अदालत ने यह भी कहा कि जांच केवल कागजी औपचारिकता न हो, बल्कि यह तय किया जाए कि किस स्तर पर चूक हुई और किसने जानबूझकर आंखें मूंदीं।

1964-65 में अधिग्रहित भूमि पर कैसे हुआ अवैध निर्माण?

हाईकोर्ट के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि—
RIMS की जमीन वर्ष 1964-65 में विधिवत अधिग्रहित की गई थी
यह भूमि अस्पताल और उससे जुड़ी सुविधाओं के लिए आरक्षित थी
इसके बावजूद वर्षों बाद इस जमीन पर अवैध रजिस्ट्री, नक्शा पास और निर्माण कराए गए
हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब जमीन सरकारी थी, तो नगर निगम, अंचल कार्यालय और राजस्व विभाग ने कैसे आंखें मूंद लीं।

अधिकारियों की मिलीभगत पर सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि—
“यदि अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार और सतर्क होते, तो लोगों को न्याय के लिए अदालत की शरण नहीं लेनी पड़ती।”


कोर्ट ने माना कि इस पूरे प्रकरण में सरकारी तंत्र की विफलता साफ झलकती है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ा।

पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि—

  • पीड़ितों को मुआवजा देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है
  • लेकिन यह राशि दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से वसूली जाएगी, न कि जनता के टैक्स के पैसों से
  • संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी

यह फैसला क्यों है अहम

यह फैसला सिर्फ रिम्स की जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे झारखंड में सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जे और प्रशासनिक मिलीभगत के खिलाफ एक मजबूत चेतावनी है।


हाईकोर्ट का यह रुख साफ करता है कि—

  • सरकारी जमीन किसी की जागीर नहीं
  • नियम तोड़ने वालों को संरक्षण नहीं मिलेगा
  • और लापरवाही करने वाले अफसर भी कटघरे में खड़े होंगे
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Pradeep Kumar is the Co-Founder of DumriExpress.com, a digital news platform. He extensively covers local news, latest updates, and trending stories, with a strong focus on Jharkhand and Bihar, along with National (Bharat), Politics, Technology, Sports, Entertainment, and International news.