रांची:
राजधानी रांची से 2 जनवरी 2026 को लापता हुए दो मासूम बच्चों को आखिरकार झारखंड पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में 13 दिन तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। दोनों बच्चों को रामगढ़ जिले के चितरपुर इलाके से सुरक्षित निकाला गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ रांची बल्कि पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
2 जनवरी से थे लापता बच्चे
जानकारी के मुताबिक, रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से 2 जनवरी 2026 को पांच वर्षीय अंश कुमार राय और चार वर्षीय अंशिका कुमारी अचानक लापता हो गए थे। दोनों बच्चे धुर्वा के मोरहाबादी क्षेत्र में अपने परिजनों के साथ रहते थे। बच्चों के गायब होने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।
लगातार कई दिनों तक बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलने से इलाके में तनाव का माहौल बन गया था और लोगों में डर व आक्रोश बढ़ता जा रहा था।
रामगढ़ के चितरपुर से मिली सफलता
पुलिस जांच के दौरान मिले तकनीकी और मानवीय इनपुट के आधार पर एक टीम को रामगढ़ जिले के चितरपुर भेजा गया, जहां से दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद किया गया। पुलिस ने इस मामले में दो संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार भी किया है, जिनसे आगे की पूछताछ जारी है।
झारखंड पुलिस की सक्रियता पर नेताओं ने जताया आभार
इस मामले को लेकर राज्य के मंत्री दीपक बिरुआ ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड पुलिस की सराहना की। उन्होंने लिखा कि यह भगवान की कृपा है कि दोनों बच्चे सुरक्षित मिल गए और समय रहते परिवार टूटने से बच गया।
उन्होंने Jharkhand Police और प्रशासन की तत्परता के लिए धन्यवाद भी जताया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर चला अभियान
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को लगातार मॉनिटरिंग और आवश्यक निर्देश दिए थे। इसी का नतीजा रहा कि पुलिस ने सीमावर्ती जिलों तक तलाशी अभियान चलाकर बच्चों को ढूंढ निकाला।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि हाल के महीनों में झारखंड में बच्चों के लापता होने की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ समय पहले धनबाद के एक अस्पताल से नवजात बच्चे की चोरी की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। ऐसे मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि शहरी इलाकों में भी बच्चों की सुरक्षा कितनी मजबूत है।
पुलिस जांच जारी, कई पहलुओं की पड़ताल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह जांच की जा रही है कि बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाया गया या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल, लोकेशन और संपर्कों की भी गहन जांच की जा रही है।
राहत की सांस, लेकिन सवाल अब भी कायम
हालांकि बच्चों की सकुशल बरामदगी से परिजनों और पूरे राज्य ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह घटना एक बार फिर बताती है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को और सतर्क होने की जरूरत है।
राज्य में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक और त्वरित कार्रवाई ही भविष्य में भरोसा कायम कर सकती है।
