रांची।
झारखंड की राजधानी रांची की हरियाली पर बीते कुछ वर्षों में गंभीर चोट पड़ी है। सैटेलाइट इमेज के ज़रिये सामने आई रिपोर्ट बताती है कि तेज़ शहरीकरण और निर्माण कार्यों की वजह से रांची में जंगल क्षेत्र लगातार घट रहा है। पिछले पांच वर्षों में राजधानी में 66 हजार से अधिक पेड़ काटे गए, जबकि कुल 28 वर्ग किलोमीटर जंगल क्षेत्र खत्म हो चुका है।
2001 से 2025 तक बदली रांची की तस्वीर
राजधानी के अलग-अलग इलाकों की 2001 और 2025 की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना करने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जहां पहले हरियाली और खुले मैदान नजर आते थे, वहां अब घनी बस्तियां, सड़कें और कंक्रीट के ढांचे दिख रहे हैं।
मोरहाबादी और आसपास के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, मोरहाबादी और उसके आसपास के इलाके हरियाली के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
- पहले जहां खुले मैदान और हरे-भरे क्षेत्र थे
- अब वहां बड़े पैमाने पर भवन निर्माण, सड़कें और कॉलोनियां खड़ी हो चुकी हैं
यह इलाका रांची विश्वविद्यालय और खेल मैदानों के कारण पहले खुला और हरा-भरा माना जाता था।
कटहल कोचा क्षेत्र में गायब हुआ मैदान
कटहल कोचा और आसपास के इलाके भी तेजी से बदल गए हैं।
- 2001 की सैटेलाइट इमेज में यह क्षेत्र खुला और हरियाली से भरा दिखता है
- 2025 की तस्वीरों में यहां घनी आबादी और निर्माण कार्य साफ नजर आता है
इसके साथ-साथ जलाशयों का आकार भी छोटा होता दिख रहा है।
जंगल क्षेत्र में भारी गिरावट
सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
- 2021 में रांची का जंगल क्षेत्र: 1168 वर्ग किमी
- 2023 में जंगल क्षेत्र: 1140 वर्ग किमी
यानी केवल दो वर्षों में ही 28 वर्ग किमी जंगल कम हो गया। यह गिरावट चिंताजनक मानी जा रही है।
तेज शहरीकरण बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि—
- अनियंत्रित निर्माण
- आबादी का बढ़ता दबाव
- सड़कों, भवनों और व्यवसायिक परियोजनाओं का विस्तार
रांची की हरियाली घटने का मुख्य कारण हैं। विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए, लेकिन उनके अनुपात में नए पौधे नहीं लगाए गए।
वन विभाग की कोशिशें, लेकिन चुनौतियां बरकरार
वन विभाग का कहना है कि शहर को हरा-भरा बनाए रखने के लिए पौधारोपण किया जा रहा है, लेकिन—
- निर्माण कार्यों का दबाव
- पेड़ों की अवैध कटाई
- शहरी विस्तार
इन प्रयासों को कमजोर कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
भविष्य के लिए चेतावनी
पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इसी रफ्तार से जंगल और हरियाली खत्म होती रही, तो—
- तापमान बढ़ेगा
- जल संकट गहराएगा
- प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ेंगी
रांची जैसी पहाड़ी और हरियाली वाली राजधानी की पहचान ही खतरे में पड़ सकती है।
