झारखंड में JSMDC की 58 खदानें बंद, 10 हजार लोगों की रोजी-रोटी पर संकट

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रांची|

झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (JSMDC) की 58 खदानों के बंद होने से राज्य में रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन खदानों से जुड़े करीब 10 हजार मजदूरों और उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ा है। खनन कार्य ठप होने से ट्रांसपोर्ट, ढुलाई, स्थानीय दुकानों और छोटे व्यवसायों पर भी संकट गहरा गया है।

खनिज संपदा से भरपूर राज्य में बेरोजगारी का सवाल

झारखंड खनिज संसाधनों के लिए देशभर में जाना जाता है, लेकिन खदानों की बंदी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संसाधन होने के बावजूद स्थानीय लोगों को बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली क्यों झेलनी पड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि खनन गतिविधियों में गिरावट का असर केवल मजदूरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे स्थानीय इकोसिस्टम पर पड़ता है।

बंदी के प्रमुख कारण

रिपोर्ट के अनुसार, खदानों के बंद होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:

  1. पर्यावरण एवं वन स्वीकृति में देरी
  2. खनन पट्टों का नवीकरण लंबित
  3. तकनीकी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ
  4. पहाड़ी/आउटलेट क्षेत्रों के चयन में देरी

इन कारणों से कई परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो सकीं, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ।

किस क्षेत्र की खदानों पर ज्यादा असर

जानकारी के अनुसार, पत्थर खदान, डोलोमाइट, चूना पत्थर और अन्य खनिज क्षेत्रों की कई इकाइयाँ प्रभावित हुई हैं। कुछ खदानें 2021 से बंद बताई जा रही हैं, जबकि कुछ में उत्पादन लंबे समय से ठप है।

विशेषज्ञों की राय

खनन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाए और लंबित स्वीकृतियों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, तो खनन गतिविधियों को फिर से शुरू किया जा सकता है। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि राज्य के राजस्व में भी सुधार होगा।

अधिकारियों का पक्ष

अधिकारियों के अनुसार, पुरानी खदानों के नवीकरण और नई स्वीकृतियों पर काम चल रहा है। प्रक्रियाएं पूरी होते ही चरणबद्ध तरीके से खनन कार्य शुरू कराने की योजना है, ताकि स्थानीय लोगों को दोबारा रोजगार मिल सके।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

खनन बंद होने से ट्रक ड्राइवर, मशीन ऑपरेटर, ठेकेदार और छोटे दुकानदारों की आय में भारी गिरावट आई है। कई परिवारों के सामने रोजमर्रा के खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।

झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्य में खदानों की बंदी एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनकर उभरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर नीतिगत फैसले लिए जाएं और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाई जाए, तो न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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Pradeep Kumar is the Co-Founder of DumriExpress.com, a digital news platform. He extensively covers local news, latest updates, and trending stories, with a strong focus on Jharkhand and Bihar, along with National (Bharat), Politics, Technology, Sports, Entertainment, and International news.