रांची ।
झारखंड में पर्यटन ढांचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रामगढ़ जिला अंतर्गत पर्यटन विहार, पतरातू में प्रीफैब कॉटेज के निर्माण के लिए तैयार विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) को तकनीकी मंजूरी प्रदान कर दी गई है। यह स्वीकृति झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड (JSBCCL) द्वारा दी गई है।a
पर्यटन विभाग से प्रीफैब कॉटेज के लिए मांगी गई प्रशासनिक स्वीकृति
इस निर्माण कार्य के लिए अब पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग को औपचारिक पत्र भेजा गया है। जेएसबीसीसीएल के कार्यपालक अभियंता ने पर्यटन सचिव से प्रशासनिक स्वीकृति देने का अनुरोध किया है, ताकि निविदा की प्रक्रिया शुरू की जा सके। तकनीकी रूप से स्वीकृत डीपीआर के अनुसार इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 3 करोड़ 54 लाख 60 हजार 600 रुपये निर्धारित की गई है।
Joint Consultant LLP संस्था ने तैयार की थी DPR
प्राप्त जानकारी के अनुसार पर्यटन विहार, पतरातू में प्रीफैब कॉटेज निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने का कार्य परामर्शी संस्था जॉइंट कंसल्टेंट एलएलपी को दिया गया था। इस संस्था द्वारा विभागीय अनुमोदन के बाद डीपीआर तैयार कर झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के मुख्यालय कार्यालय में समर्पित किया गया था।
डीपीआर सौंपे जाने के बाद जेएसबीसीसीएल द्वारा इसकी विस्तृत तकनीकी जांच की गई, जिसमें इसे उपयुक्त और मानकों के अनुरूप पाया गया। इसके बाद महाप्रबंधक (योजना एवं नियोजन), जेएसबीसीसीएल, रांची द्वारा परियोजना को तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई।
प्रीफैब तकनीक से निर्माण कार्य में लगेगा कम समय
प्रीफैब तकनीक से निर्माण कार्य कम समय में होने के साथ-साथ इसे पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है। डीपीआर में प्रस्तावित निर्माण कार्यों के विभिन्न अवयवों और उनकी प्राक्कलित राशि का विस्तृत विवरण शामिल है।
इस परियोजना में आधुनिक सुविधाओं से युक्त 10 प्रीफैब कॉटेज, आधारभूत संरचना, आंतरिक सुविधाएं तथा अन्य सहायक निर्माण कार्य शामिल किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना के पूर्ण होने से पर्यटन विहार पतरातू की आकर्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे न केवल राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
प्रीफैब कॉटेज की विशेषताएं
- ढांचा और भाग फैक्ट्री में पहले से तैयार होते हैं, जिससे साइट पर असेंबलिंग जल्दी होती है।
- मौसम पर निर्भरता कम होती है, जिससे निर्माण कार्य समय पर पूरा हो जाता है।
- मटेरियल और श्रम की लागत कम होती है तथा मरम्मत की आवश्यकता भी कम रहती है।
- मानकों के अनुसार हर भाग का परीक्षण होता है, जिससे निर्माण में त्रुटियां कम होती हैं।
- यातायात, स्थल आकृति और जरूरत के हिसाब से आसानी से अनुकूलित किया जा सकता है।
- दीवारों, छत और फर्श में अच्छी थर्मल और साउंड इन्सुलेशन के विकल्प मिलते हैं।
