रांची | राज्य में करीब एक दशक बाद प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई। चयन परीक्षा और काउंसिलिंग के बाद पिछले वर्ष दिसंबर से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई। लेकिन कई शिक्षकों के लिए यह नियुक्ति विडंबना बन गई।
ऐसे कई शिक्षक हैं जो नियुक्ति के कुछ ही महीनों बाद सेवानिवृत्त हो गए। कई को वेतन और पेंशन का लाभ भी नहीं मिल पाया। अनुमान है कि इस वर्ष 500 से अधिक शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाएंगे, जबकि इनकी नियुक्ति पिछले वर्ष ही हुई थी।
10 हजार नियुक्ति, बड़ी संख्या जल्द रिटायर
- पिछले वर्ष प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में 10 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई
- लंबे अंतराल के बाद नियुक्ति होने से उम्र सीमा में छूट दी गई
- शिक्षकों के लिए 50% सीट आरक्षित थी
- अधिकतम उम्र सीमा 58 वर्ष तक रखी गई
- कई शिक्षकों की नियुक्ति ऐसे वर्ष में हुई जब वे सेवानिवृत्ति के करीब थे
पदों और रिक्तियों की स्थिति
- शिक्षकों के कुल पद: 50 हजार
- प्रथम चरण नियुक्ति परीक्षा: 26 हजार पद
- नियुक्ति हुई: 10 हजार
- रिक्त रह गए: 16 हजार
- दूसरे चरण के रिक्त पद: 24 हजार
- कुल रिक्त पद: 40 हजार
क्यों नियुक्ति के साथ ही सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षक
राज्य में लंबे अंतराल के बाद नियुक्ति होने के कारण सरकार ने उम्र सीमा में छूट दी। जितने वर्षों तक नियुक्ति नहीं हुई, उतने वर्षों की छूट दी गई। करीब सात वर्षों का अंतराल होने से अभ्यर्थियों को सात वर्ष की अतिरिक्त छूट मिली।
अलग-अलग वर्गों के लिए अधिकतम उम्र सीमा
- सामान्य और ईडब्ल्यूएस: 47 वर्ष
- ओबीसी: 49 वर्ष
- एससी/एसटी: 52 वर्ष
- सहायक अध्यापक (पारा शिक्षक): 58 वर्ष
इसका परिणाम यह हुआ कि बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी चयनित हुए जो सेवानिवृत्ति आयु के बेहद करीब थे। नियुक्ति के तुरंत बाद वे सेवानिवृत्त होने लगे।
कई शिक्षकों को न तो नियमित रूप से पढ़ाने का मौका मिल पाया और न ही लंबी सेवा का लाभ। कुछ को सेवानिवृत्ति के बाद अन्य वैधानिक लाभ मिल रहे हैं, लेकिन कई अब भी प्रक्रिया में हैं।
केस स्टडी – 01
नाम: अंकित चौधरी
- योगदान: 1 दिसंबर 2025
- सेवानिवृत्ति तिथि: 31 जनवरी 2026
- स्कूल: राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कोकरिया टोली
स्थिति: समय पर प्रशिक्षण और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होने से नुकसान हुआ। उन्होंने 2010 में शिक्षक प्रशिक्षण लिया, छह साल बाद टेट पास किया। नियुक्ति प्रक्रिया में देरी से अंततः नियुक्ति मिली, लेकिन दो महीने बाद ही सेवानिवृत्ति आ गई। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में पेंशन और अन्य सुविधाएं दी जानी चाहिए।
केस स्टडी – 02
नाम: राजेश कुमार श्रीवास्तव
- योगदान: 1 दिसंबर 2025
- सेवानिवृत्ति तिथि: 31 जनवरी 2026
- स्कूल: प्राथमिक विद्यालय, अक्तर टोला
उन्होंने 1991 में शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की थी। 2011 में प्रशिक्षण प्राप्त किया और बाद में दो बार पात्रता परीक्षा पास की। लंबे इंतजार के बाद नियुक्ति मिली, लेकिन अब वेतन और सेवा लाभ लिए बिना सेवानिवृत्त होने की स्थिति में हैं।
राज्य में नियुक्ति प्रक्रिया में देरी और उम्र सीमा छूट के कारण उत्पन्न इस स्थिति को लेकर शिक्षकों में असंतोष है। कई शिक्षक इसे प्रशासनिक देरी का परिणाम मान रहे हैं।
