झारखंड में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (झारखंड में Special Intensive Revision (SIR) अभियान की शुरुआत कर दी है। इस बार प्रक्रिया में बड़ा बदलाव यह है कि मतदाता सूची में पहले से नाम दर्ज होने पर भी अब सभी नागरिकों को पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज़ जमा करने होंगे।
यह कदम राज्यभर में मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी, सटीक और अद्यतन बनाने के लिए उठाया गया है। आयोग का कहना है कि पिछले वर्षों में मिले कई गलत नाम, दोहराव, मृत व्यक्तियों के नाम का न हटना, स्थानांतरित लोगों के पुराने पते पर नाम रह जाना — जैसी समस्याएँ चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही थीं। इसलिए इस बार मतदाता पहचान की पूरी प्रक्रिया को दस्तावेज़–आधारित किया जा रहा है।
क्यों जरूरी हुआ यह नया नियम?
चुनाव आयोग के अनुसार, पिछले SSR वर्षों में कई चुनौतियाँ सामने आईं:
- डुप्लीकेट मतदाता — एक व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज होना
- मृत मतदाताओं की प्रविष्टि — जिन्हें सूची से हटाया नहीं गया
- पते में बदलाव — लेकिन मतदाता सूची में अपडेट नहीं
- फर्जी मतदाता — बाहरी राज्यों से आए लोग गलत पता देकर नाम जुड़वा लेते हैं
- अयोग्य मतदाता — आयु या पात्रता पूरी न होने पर भी नाम दर्ज
इन त्रुटियों को दूर किए बिना निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं।
इसीलिए आयोग ने स्पष्ट किया:
“नाम दर्ज होना ही अंतिम सत्यापन नहीं है। हर नागरिक को दस्तावेज़ देना अनिवार्य है।”
कौन-कौन से दस्तावेज़ जमा करने होंगे?
चुनाव आयोग ने दस्तावेजों की एक तय सूची जारी की है। इनमें से कोई भी दस्तावेज़ पहचान/निवास प्रमाण के लिए स्वीकार्य होगा।
पहचान/जन्म प्रमाण के दस्तावेज़
- जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
- 10वीं / 12वीं / विश्वविद्यालय प्रमाण पत्र
- कार्यस्थल का सरकारी ID कार्ड
- पेंशन भुगतान आदेश
- जुलाई 1987 से पहले जारी कोई भी सरकारी पहचान पत्र
- राष्ट्रीय नागरिक पंजी (जहाँ लागू)
जाति/सामाजिक पहचान
- SC / ST / OBC प्रमाण पत्र
- वनाधिकार पत्र (जहाँ लागू)
निवास प्रमाण
- बिजली/पानी बिल
- बैंक या डाकघर की पासबुक
- ग्राम पंचायत/नगर निकाय से जारी रिहायशी प्रमाण
- सरकारी आवास आवंटन पत्र
- राशन कार्ड
आधार कार्ड को सहायक दस्तावेज़ माना जाएगा, नागरिकता प्रमाण नहीं।
आधार कार्ड की भूमिका — सबसे बड़ी स्पष्टता
चुनाव आयोग ने स्पष्ट कहा है:
“आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है।”
इसलिए मतदाता सूची में सिर्फ आधार दिखाकर नाम दर्ज नहीं होगा।
आधार को केवल सहायक पहचान दस्तावेज़ के रूप में लिया जाएगा, प्राथमिक दस्तावेज़ के रूप में नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार —
आधार न देने पर किसी भी मतदाता का नाम हटाया नहीं जा सकता।
BLO घर-घर जाकर दस्तावेज़ सत्यापन करेंगे
पूरे झारखंड में BLO टीम घर-घर जाकर—
- दस्तावेज़ की जाँच
- पते की पुष्टि
- जन्मतिथि सत्यापन
- नई प्रविष्टि
- मृत/स्थानांतरित व्यक्तियों का नाम हटाना
—जैसी प्रक्रियाएँ कर रही है।
अगर कोई व्यक्ति घर पर उपलब्ध नहीं है, तो BLO नोट चिपका कर दस्तावेज़ कार्यालय में जमा करने की सलाह देता है।
पहली बार वोटर बनने वालों के लिए क्या नियम हैं?
पहली बार नाम जोड़ने वालों (18+ युवाओं) के लिए:
- जन्म प्रमाण पत्र / 10वीं प्रमाण पत्र अनिवार्य
- निवास का स्पष्ट प्रमाण
- फोटो पहचान पत्र
- आवश्यक फॉर्म (Form-6) भरना होगा
18 साल पूरे होने वाले युवाओं को इस SSR में प्राथमिकता दी जा रही है।
पुराने मतदाताओं को भी दस्तावेज़ अपडेट करने पड़ेंगे
कई लोग वर्षों से एक ही पते पर नहीं रहते।
इस बार आयोग ने इन लोगों के लिए विशेष नियम लागू किया है:
- नया पता देने पर नए दस्तावेज़ भी देना अनिवार्य
- पुराने दस्तावेज़ चलेंगे नहीं
- किराएदारों को किराया रसीद/मालिक का प्रमाण अनिवार्य
SSR की पूरी टाइमलाइन
- 1 जनवरी 2026 – घर-घर सत्यापन शुरू
- 15 जनवरी 2026 – दावा/आपत्ति की समय-सीमा
- 10 फरवरी 2026 – दस्तावेज़ सत्यापन पूरा
- 30 मार्च 2026 – अंतिम संशोधित मतदाता सूची जारी
ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध — घर बैठे कर सकते हैं अपलोड
नागरिक
- NVSP पोर्टल
- Voter Helpline App
के माध्यम से दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं।
इससे BLO को घर आने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
चुनाव आयोग का संदेश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) झारखंड ने कहा—
“मतदाता सूची देश का सबसे बड़ा पहचान दस्तावेज़ है। इसे साफ-सुथरा रखना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। हर नागरिक दस्तावेज़ अवश्य जमा करे।”
पहली बार
- नाम दर्ज होने के बावजूद दस्तावेज़ अनिवार्य
- आधार अनिवार्य नहीं
- सटीक और पारदर्शी वोटर लिस्ट
—पर जोर दिया जा रहा है।
यह बदलाव आने वाले चुनावों की विश्वसनीयता को मजबूत करेगा।



