झारखंड में चल रहे शराब घोटाले की जांच ने एक बार फिर बड़ा पर्दाफाश किया है। न्यायालय में ECI (इकोनॉमिक क्राइम इन्वेस्टिगेशन) द्वारा केस डायरी जमा करने के बाद पता चला है कि राज्य में शराब की सप्लाई और बिक्री के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध कमीशन वसूला जा रहा था।
जांच में सामने आया है कि शराब की एक-एक पेटी पर 300 से 600 रुपये तक कमीशन लिया जाता था। यह पैसा सिस्टम में शामिल कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और बिचौलियों तक पहुँचता था।
ECI की रिपोर्ट में क्या सामने आया?
- शराब घोटाले में विनय चौबे, त्रिपाठी समेत कई लोगों की भूमिका बताई गई है।
- देसी शराब की सप्लाई के दौरान घटिया क्वालिटी की शराब वितरित की जाती थी।
- सप्लाई चेन को नियंत्रित करने के लिए अवैध वसूली का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
- ट्रांसपोर्टेशन से लेकर वितरण तक कई स्तरों पर पैसा वसूला जाता था।
- कुछ लोगों ने इस कमीशन मॉडल को लागू करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से रास्ता तैयार किया।
पहले भी हुआ था 40–50 करोड़ वसूली का खुलासा
इससे पहले रिपोर्ट में बताया गया था कि इसी घोटाले में 40 से 50 करोड़ रुपये तक की वसूली की जानकारी मिल चुकी है। अब नए दस्तावेज़ों के आने से यह साफ हो रहा है कि यह घोटाला बेहद गहरा और संगठित था।
जांच एजेंसियाँ अब उन सभी संबंधित अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका की फिर से जांच कर रही हैं, जिन्होंने इस पूरी व्यवस्था को चलाने में मदद की।
आगे क्या होगा?
मामला गंभीर है और जांच एजेंसियाँ अब तक जुटाए गए सबूतों के आधार पर अगली कार्रवाई करने की तैयारी कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं।
