झारखंड सरकार ने अफीम की अवैध खेती को रोकने के लिए बड़ा और सख्त फैसला लिया है। गृह विभाग ने सभी जिलों के एसपी को स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अफीम की खेती होती है और पंचायत प्रतिनिधि इसकी जानकारी पुलिस को नहीं देते, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
इलाके में अफीम की खेती मिली तो पंचायत प्रतिनिधि होंगे जिम्मेदार, गृह विभाग ने जारी किया सख्त आदेश
यह आदेश उस रिपोर्ट के बाद जारी किया गया, जिसमें पाया गया कि झारखंड के कई जिलों—खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, हजारीबाग, चतरा, लातेहार, पलामू और गुमला—में अफीम की खेती के मामले सामने आते रहते हैं।
जनवरी, फरवरी और मार्च के महीनों में अफीम के पौधे सबसे ज्यादा उगाए जाते हैं।
पंचायत प्रतिनिधि को क्या करना होगा?
सरकार ने कहा है कि:
- यदि किसी क्षेत्र में अफीम की खेती चल रही है
- या खेती की तैयारी हो रही है
- या कोई संदिग्ध गतिविधि दिखती है
तो पंचायत प्रतिनिधि को तुरंत स्थानीय थाना या पुलिस अधिकारी को जानकारी देना अनिवार्य होगा।
यदि सूचना नहीं दी जाती है, और बाद में अफीम की खेती पकड़ी जाती है, तो प्रतिनिधि पर कार्रवाई होगी।
अफीम की खेती क्यों खतरनाक?
गृह विभाग की रिपोर्ट के अनुसार:
- यह खेती समाज के लिए हानिकारक है
- देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है
- अफीम का उपयोग नशे और अवैध कारोबार में होता है
- ड्रग्स का नेटवर्क अपराध को बढ़ावा देता है
सरकार ने कहा है कि अफीम की खेती रोकना राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है।
अभी क्या कार्रवाई चल रही है?
पिछले कुछ वर्षों में पुलिस, वन विभाग और अन्य एजेंसियों की संयुक्त टीमों ने कई बार अफीम की फसल नष्ट की है।
कई जगहों पर गांवों में अभियान चलाकर लोगों को जागरूक भी किया गया है।
सरकार का मानना है कि यदि पंचायत प्रतिनिधि सहयोग करें, तो अफीम की खेती को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
पंचायत प्रतिनिधियों पर भी हो सकती है कार्रवाई
निर्देश के अनुसार—
- यदि प्रतिनिधि सूचना नहीं देता है
- और अफीम की खेती पकड़ी जाती है
- तो प्रतिनिधि को लापरवाही या संलिप्तता के आधार पर आरोपी बनाया जा सकता है
सरकार ने उम्मीद जताई है कि इस कदम से अफीम उत्पादन पर लगाम लगेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध गतिविधियाँ कम होंगी।
