रांची। झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य में 27-28 January से आचार संहिता लागू होने की संभावना है। मुख्यमंत्री Hemant Soren ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत से जुटने की अपील की है।
मुख्यमंत्री का संदेश: संगठन मजबूत करें
मुख्यमंत्री Hemant Soren ने कहा कि नगर निकाय चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद होते हैं। ऐसे में सभी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करें, जनता से सीधे संवाद करें और सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाएं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आचार संहिता के दौरान कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक मर्यादा और चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन अनिवार्य है।
फरवरी 2026 में होंगे नगर निकाय चुनाव
इससे पहले राज्यपाल की सहमति के बाद यह साफ हो चुका है कि नगर निकाय चुनाव फरवरी महीने में कराए जाएंगे। लंबे समय से लंबित पड़े इन चुनावों को लेकर जनता में भी खासा उत्साह है।
राज्य के कई नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में प्रतिनिधि नहीं होने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा था, लेकिन चुनाव के बाद स्थानीय सरकार फिर से पूरी तरह सक्रिय होगी।
क्यों अहम हैं नगर निकाय चुनाव?
नगर निकाय चुनाव सीधे तौर पर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े होते हैं। इसके तहत:
- सफाई, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट
- टैक्स व्यवस्था और नगर विकास
- स्थानीय रोजगार और योजनाओं का क्रियान्वयन
जैसे मुद्दों पर चुने गए प्रतिनिधि फैसले लेते हैं।
आचार संहिता लागू होते ही सभी दलों ने प्रत्याशी चयन, वार्ड स्तर की बैठकें और रणनीति बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति पूरी तरह नगर निकाय चुनाव के इर्द-गिर्द घूमती नजर आएगी।
