रांची:
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की चर्चित जेपीएससी-02 नियुक्ति परीक्षा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू कर दी है। ईडी ने इस मामले में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सदस्यों, चयनित अधिकारियों, परीक्षकों और निजी एजेंसी से जुड़े लोगों समेत 60 से अधिक आरोपियों के खिलाफ ईसीआईआर (ECIR) दर्ज की है।
ईडी की यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा वर्ष 2024 में दाखिल चार्जशीट के आधार पर की गई है। ईसीआईआर दर्ज होने के साथ ही अब मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) के तहत जांच औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।
आयोग के पूर्व अध्यक्ष व सदस्य जांच के घेरे में
ईडी की ईसीआईआर में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप कुमार प्रसाद के अलावा तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद, शांति देवी, राधागोविंद नागेश, एलिस उषा रानी सिंह और अरविंद कुमार सिंह के नाम शामिल हैं। आयोग के तत्कालीन पदाधिकारियों पर परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप है।
चयनित अधिकारी भी ईडी के रडार पर
घोटाले में चयनित कई परीक्षार्थी, जो वर्तमान में राज्य प्रशासन और पुलिस सेवा में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, ईडी की जांच के दायरे में हैं। इनमें राधा प्रेम किशोर, बिनोद राम, हरिशंकर बड़ाइक, हरिहर सिंह मुंडा, रवि कुमार कुजूर, मुकेश कुमार महतो, कुंदन कुमार सिंह, मौसमी नागेश, कानू राम नाग, प्रकाश कुमार, संगीता कुमारी, रजनीश कुमार, शिवेंद्र, संतोष कुमार, रोहित सिन्हा, शैलेश कुमार श्रीवास्तव, अमित कुमार, राहुल जी आनंद जी, इंद्रजीत सिंह, शिशिर कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, रामकृष्ण कुमार, प्रमोद राम, विकास कुमार पांडेय, मनोज कुमार, सुदामा कुमार और कुमुद कुमार शामिल हैं।
प्रोफेसर और परीक्षक भी आरोपी
इस बहुचर्चित घोटाले में देश के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जुड़े प्रोफेसर और परीक्षक भी आरोपी बनाए गए हैं। इनमें बीएचयू, काशी विद्यापीठ, रांची कॉलेज, डीएवी कॉलेज (बनारस), हिंदू पीजी कॉलेज सहित अन्य संस्थानों के तत्कालीन प्रोफेसर, रीडर, डीन और इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा निजी संस्था ग्लोबल इंफॉरमेटिक के मैनेजर धीरज कुमार का नाम भी जांच सूची में है।
क्या था जेपीएससी-02 नियुक्ति घोटाला

जांच के दौरान यह सामने आया था कि जेपीएससी-02 परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं में अंक बढ़ाकर, टेंपरिंग कर और आयोग के अधिकारियों व परीक्षकों की मिलीभगत से कई अयोग्य उम्मीदवारों को चयनित कराया गया था।
प्रारंभ में राज्य सरकार ने मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सौंपी थी, लेकिन जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2012 में सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की।
सीबीआई ने लगभग 12 वर्षों की लंबी जांच के बाद वर्ष 2024 में आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। वर्तमान में इस मामले के सभी आरोपी जमानत पर हैं।
आईपीएस बन चुके अधिकारी भी जांच में
जेपीएससी द्वारा आयोजित इस परीक्षा में चयनित राज्य पुलिस सेवा के कुछ अधिकारी बाद में प्रोन्नति पाकर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी बन चुके हैं। डीएसपी से आईपीएस बने अधिकारियों में अरविंद कुमार सिंह और विकास कुमार पांडेय शामिल हैं।
इसके अलावा 9 दिसंबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शिवेंद्र, राधा प्रेम किशोर और मुकेश कुमार महतो को शर्तों के साथ आईपीएस में प्रोन्नति प्रदान की है।
ईडी जांच से फिर सुर्खियों में मामला
ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू किए जाने के बाद जेपीएससी-02 नियुक्ति घोटाला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जांच एजेंसी अब घोटाले से जुड़े धन के लेन-देन, संपत्ति अर्जन और लाभार्थियों की भूमिका की गहन पड़ताल करेगी।
