अवैध पत्थर खनन मामले में झारखंड सरकार को बड़ी कानूनी झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, CBI को इस पूरे मामले में अपनी जांच जारी रखने और चार्जशीट दायर करने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है मामला?
साहिबगंज जिले में अवैध खनन को लेकर लगभग 1500 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का आरोप सामने आया था। CBI ने 2022 में इस केस से जुड़ी कई गिरफ्तारियां भी की थीं। आरोप है कि लंबे समय तक बड़े पैमाने पर अवैध खनन हुआ और सरकारी तंत्र की ओर से कार्रवाई नहीं की गई।
CBI ने दावा किया था कि अवैध खनन में सरकारी अधिकारियों, स्थानीय नेताओं और खनन माफिया की मिलीभगत रही है। इसी जांच को रोकने के लिए झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने साफ कहा कि–
- राज्य सरकार जांच को रोकने के प्रयास कर रही है, यह उचित नहीं।
- SLP स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता।
- CBI को जांच आगे बढ़ाने दी जाए।
कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को भी सही ठहराया, जिसमें CBI को जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
क्यों फंसी सरकार?
कोर्ट ने कई बार पूछा कि राज्य सरकार किस आधार पर CBI की जांच रोकना चाहती है। सरकार की ओर से जवाब में कहा गया कि CBI ने बिना अनुमति FIR दर्ज की है। लेकिन कोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता देखते हुए जांच रोकी नहीं जा सकती।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद CBI:
- बड़े पैमाने पर खनन घोटाले की जांच जारी रखेगी
- संबंधित अधिकारियों और नेताओं से पूछताछ तेज करेगी
- अवैध लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और संपत्ति की जांच करेगी
- जल्द ही चार्जशीट दायर कर सकती है
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में कई और गिरफ्तारी या नोटिस जारी हो सकते हैं।
राजनीतिक हलचल भी तेज
यह मामला झारखंड की राजनीति में पहले से ही चर्चा का केंद्र रहा है। विपक्ष लगातार सरकार पर खनन माफिया को बचाने का आरोप लगाता रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विपक्ष को और ताकत मिली है।
