रांची |
झारखंड सरकार की गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। योजना के तहत छात्रों को 4 प्रतिशत ब्याज दर पर ₹15 लाख तक का शिक्षा ऋण देने का दावा किया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ योजना लॉन्च कर देना ही काफी है, या झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की गहरी समस्याओं को भी साथ-साथ देखना जरूरी है?
अब तक कितने छात्रों को मिला फायदा?
झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना (GSCC) के तहत राज्य के हजारों छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता मिल रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक 2430 छात्रों को कुल ₹200 करोड़ का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है।
ताज़ा अपडेट के मुताबिक, 52 छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए ऋण स्वीकृत किया गया, जिससे योजना के दायरे में आने वाले लाभार्थियों की संख्या और बढ़ गई है। यह ऋण छात्रों को डिप्लोमा से लेकर PhD तक की पढ़ाई के लिए दिया जा रहा है।
सरकारी दावों के अनुसार, योजना शुरू होने के बाद हजारों छात्रों ने आवेदन किया है, लेकिन
- कितने छात्रों को वास्तव में ऋण स्वीकृत हुआ,
- कितनों को पैसा समय पर मिला,
- और कितने छात्र आज भी फाइलों और बैंक प्रक्रिया में अटके हैं,
इसका स्पष्ट और सार्वजनिक डेटा अभी सीमित है।
यही वजह है कि योजना की सफलता को आंकने के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग जरूरी हो जाती है।
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झारखंड में छात्रों की वास्तविक स्थिति क्या है?
झारखंड उन राज्यों में शामिल है जहाँ—
- प्रतियोगी परीक्षाएँ 8–10 साल में एक बार होती हैं
- कई परीक्षाएँ बार-बार रद्द होती हैं
- पेपर लीक, रिजल्ट में गड़बड़ी और कोर्ट केस आम हैं
छात्र सालों तक तैयारी करते हैं, लेकिन
- परीक्षा समय पर नहीं होती
- और जब होती है, तो उस पर भरोसा नहीं रह जाता
ऐसे में सिर्फ शिक्षा ऋण देना काफी नहीं,
भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली भी उतनी ही जरूरी है।
बिना परीक्षा नौकरी, पेपर लीक और भ्रष्टाचार — इसके बाद क्या?
राज्य में बीते वर्षों में ऐसे मामले सामने आए जहाँ—
- बिना परीक्षा नौकरी मिलने के आरोप लगे
- पेपर लीक के कारण परीक्षाएँ रद्द हुईं
- जांच एजेंसियों की कार्रवाई हुई, लेकिन
- छात्रों का नुकसान कभी पूरा नहीं हो पाया
हर घोटाले के बाद—
- कुछ अधिकारी बदले गए
- कुछ मामले कोर्ट में गए
- लेकिन पूरा सिस्टम जस का तस बना रहा
इसका सीधा असर छात्रों के मनोबल पर पड़ा।
ऐसे माहौल में शिक्षा ऋण योजना कितना कारगर?
गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का मकसद सही है—
कोई छात्र पैसे की कमी के कारण पढ़ाई न छोड़े।
लेकिन सवाल उठते हैं:
- अगर पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की प्रक्रिया ही भरोसेमंद नहीं हो
- अगर परीक्षाएँ समय पर न हों
- अगर चयन प्रक्रिया पर सवाल हों
तो क्या छात्र सिर्फ कर्ज लेकर अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ रहा है?
यह भी सच है कि—
- गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को पढ़ाई का मौका मिलेगा
- प्रोफेशनल कोर्स (इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट) तक पहुंच बढ़ेगी
- झारखंड जैसे राज्य में यह योजना उम्मीद की किरण है
लेकिन यह उम्मीद तभी टिकेगी जब
शिक्षा + परीक्षा + नियुक्ति — तीनों सिस्टम एक साथ सुधरें।
असली सवाल यही है
- क्या सरकार शिक्षा ऋण के साथ-साथ परीक्षा सुधार पर भी उतनी ही गंभीर है?
- क्या पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर स्थायी समाधान निकलेगा?
- क्या छात्र सिर्फ कर्जदार नहीं, बल्कि सशक्त नागरिक बन पाएंगे?
गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना एक मजबूत शुरुआत हो सकती है,
लेकिन सिर्फ योजना नहीं, सिस्टम बदलना असली इम्तिहान है।
