झारखंड में फर्जी कंपनियों के नाम पर परमिट (ई-वे बिल) जारी कर 330.54 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार का बड़ा मामला सामने आया है। इस घोटाले में कोयला, लोहा और सीमेंट की बड़े पैमाने पर अवैध ढुलाई की गई।
कैसे हुआ खेल?
- फर्जी कंपनियों के नाम पर ई-वे बिल जनरेट किए गए
- इन ई-वे बिलों का इस्तेमाल कर खनिज और निर्माण सामग्री की ढुलाई हुई
- बाद में कंपनियां कागजों में बंद पाई गईं
जांच में क्या सामने आया
- पिछले 7 महीनों में 10 फर्जी शेल कंपनियां सामने आईं
- जांच में ₹61.89 करोड़ के टैक्स चोरी का भी खुलासा
- कई कंपनियों के पते पर खाली जमीन या बंद कार्यालय मिले
ऐसे चलता है फर्जीवाड़ा
- फर्जी कंपनी रजिस्टर
- ई-वे बिल जनरेट
- माल की ढुलाई
- टैक्स चोरी
- कंपनी गायब
अब क्या कार्रवाई होगी ?
राज्य सरकार और जांच एजेंसियों ने:
- सभी संदिग्ध ई-वे बिल की री-वेरिफिकेशन शुरू की
- दोषी कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई और रिकवरी की तैयारी
- टैक्स, खनन और वाणिज्य विभाग को संयुक्त जांच का निर्देश
