जमशेदपुर/रांची/सिंहभूम |
झारखंड में मानव और हाथी के बीच संघर्ष अब गंभीर संकट का रूप ले चुका है।
दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच राज्य में हाथियों के हमले में 31 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
रविवार को बोकारो के गोमिया में एक व्यक्ति को हाथियों द्वारा कुचलने की घटना सामने आई। इस घटना ने एक बार फिर वन विभाग की तैयारियों और संरक्षण नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मानव-हाथी संघर्ष बना गंभीर संकट
वन विभाग के अनुसार, जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच राज्य में हाथियों के हमले में 31 मौतें हुई हैं।
पश्चिमी सिंहभूम जिले में अकेले 22 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
वन विभाग की योजनाओं का नहीं दिख रहा असर
वन विभाग ने 10 साल का विजन प्लान तैयार किया है।
रांची में एलीफेंट सेंटर खोलने,
ट्रैकिंग सिस्टम,
रेलवे ट्रैक पर अलर्ट सिस्टम,
टॉवर और सोलर फेंसिंग जैसी योजनाएं बनाई गईं,
लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का असर नहीं दिख रहा।
कोल्हान में पश्चिमी सिंहभूम जिला सबसे अधिक प्रभावित
मानव-हाथी संघर्ष से पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा, गुदड़ी, मनोहरपुर),
सरायकेला-खरसावां (चांडिल, ईचागढ़),
सिंहभूम, बोकारो, खूंटी, गोड्डा
जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं।
इन इलाकों में हाथियों से बचाव के लिए पर्याप्त संरचनात्मक उपाय नहीं होने से हालात बिगड़े हैं।
जंगल कटाई और शहरीकरण से बढ़ी परेशानी
विशेषज्ञों का कहना है कि
- जंगल कटाई,
- शहरीकरण,
- रेलवे लाइन और सड़क निर्माण,
- हाथियों के प्राकृतिक मार्ग में बाधा
के कारण हाथी भोजन की तलाश में गांवों की ओर आ रहे हैं।
हाथियों का झुंड लगातार कर रहा हमला
16 दिसंबर 2025 को रात में झुंड ने कई ग्रामीणों पर हमला किया।
इसके बाद से लगातार 19 दिनों तक हाथी हिंसक बने रहे।
100 से ज्यादा घर और फसलें भी तबाह
हाथियों के हमले में
- 100 से अधिक घर क्षतिग्रस्त,
- कई किसानों की फसल बर्बाद,
- लोगों को गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की मदद समय पर नहीं मिलती।
