झारखंड में बिजली से जुड़ी सबसे बड़ी खबर सामने आई है। राज्य की बिजली कंपनी JBVNL ने अब कोरबा और फरक्का से बिजली लेना बंद कर दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि झारखंड खुद इतनी बिजली बनाने की क्षमता तैयार कर चुका है कि भविष्य में सरप्लस स्टेट बन सकेगा।
JBVNL को पहले 800-1000 मेगावॉट बिजली कोरबा और फरक्का प्लांट से मिलती थी। लेकिन अब राज्य के अपने पतरातू, दामोदर घाटी निगम (DVC) और अन्य स्रोतों से पर्याप्त बिजली मिल रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड को अभी कुल 1190 मेगावॉट बिजली मिल रही है जिसमें से अधिकतर व्यवस्था राज्य के अंदर से पूरी हो रही है। इससे राज्य को हर साल लगभग 276 करोड़ रुपये की बचत होगी।
2026 तक झारखंड में 3500 MW बिजली बनने लगेगी
पतरातू थर्मल प्लांट की नई यूनिट अगले वर्ष चालू हो जाएगी। पूरी तरह तैयार होने पर पतरातू से ही करीब 2400 MW बिजली मिलेगी।
इसके अलावा:
- नॉर्थ कर्णपुरा से 650 MW
- DVC की तरफ से 300–500 MW
- और अन्य स्रोतों से लगभग 250–300 MW
इस तरह 2026 तक झारखंड की कुल उत्पादन क्षमता 3500 MW तक पहुँच जाएगी।
झारखंड बिजली में आत्मनिर्भर क्यों हो रहा है?
- राज्य तेजी से उद्योगिक विकास कर रहा है
- बिजली उत्पादन के नए प्लांट चालू हो रहे हैं
- बाहर से बिजली खरीदना महंगा पड़ रहा था
- नई तकनीक और प्लांट से लागत कम होगी
लाभ क्या होगा?
- बाहर से बिजली खरीद कम
- राज्य की आर्थिक बचत
- उद्योगों को निर्बाध बिजली
- ग्रामीण इलाकों में बेहतर सप्लाई
- झारखंड भविष्य में सरप्लस बिजली बेच भी सकता है
JBVNL का यह कदम झारखंड के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में राज्य न सिर्फ आत्मनिर्भर होगा बल्कि बिजली आपूर्ति का बड़ा केंद्र भी बन सकता है।
