रांची।
आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित समारोह में JSSC CGL (Combined Graduate Level) परीक्षा-2023 में सफल 1,900 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने चयनित उम्मीदवारों और उनके परिवारों को बधाई दी और उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
CGL परीक्षा — कब और कैसे हुई?
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित CGL-2023 परीक्षा को मूल रूप से 28 जनवरी 2024 को आयोजित किया गया था। लेकिन इसके बाद परीक्षा को लेकर प्रश्नपत्र लीक के आरोप उठे, जिससे विवाद पैदा हुआ और परीक्षा की प्रक्रियाएँ कई बार कोर्ट में चलीं।
इन आरोपों के कारण झारखंड सरकार और JSSC को कई स्तर पर जवाब देना पड़ा। अभ्यर्थियों के एक समूह ने राज्यपाल से न्यायिक जांच की मांग भी की थी।
बाद में कोर्ट के निर्देशों और उच्चतम न्यायिक प्रक्रिया के बाद, 8 दिसंबर 2025 को JSSC ने अंतिम Merit list जारी की, जिसमें 10 अभ्यर्थियों को छोड़कर बाकी सभी सफल उम्मीदवारों के परिणाम घोषित किए गए।
इस प्रक्रिया समाप्त होने के बाद नियुक्ति पत्र वितरण की तिथि तय कर दी गई और आज यह समारोह आयोजित हुआ।
नियुक्ति पत्र वितरण का कार्यक्रम
आज आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इन विभागों में चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिया। इनमें मुख्य शामिल हैं:
- सहायक सचिवालय अधिकारी (ASO)
- प्रखंड कल्याण अधिकारी
- प्रखंड आपूर्ति अधिकारी
- श्रम प्रवर्तन अधिकारी
- अंचल निरीक्षक
- कनिष्ठ सचिवालय सहायक
- नियोजन सहायक जैसे पदों के लिए नियुक्तियाँ
प्रक्रिया और प्रशासनिक तैयारी
इस कार्यक्रम की तैयारी महीनों पहले से शुरू हो गई थी। मुख्य कार्य सचिव, फाइनेंस विभाग और DC Ranchi को कार्यक्रम के सफल आयोजन का निर्देश दिया गया। मोरहाबादी मैदान को ऐतिहासिक और प्रभावशाली बनाने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतज़ाम किए।
विवाद और कोर्ट की भूमिका
JSSC CGL परीक्षा के बारे में विवाद कोर्ट तक पहुँचे थे। झारखंड हाईकोर्ट ने कई याचिकाओं की सुनवाई की और कुछ मामलों पर रोक भी लगाई। हाल ही में, अदालत ने CGL परीक्षा के लिए CBI जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिससे परीक्षा के निष्पक्षता वाले तथ्यों पर स्थिति स्पष्ट हुई।
एक समय पेपर लीक के आरोपों ने JSSC और सरकार पर पर सवाल खड़े किए, लेकिन जांच और प्रक्रिया के बाद आज अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने के बाद ये सभी विवाद यही थम गए।
