रांची जिले के पूर्व उपायुक्त और वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात आईएएस अधिकारी राय महिमापत रे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। झारखंड की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उनके खिलाफ ‘आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने’ के मामले में प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) शुरू कर दी है। यह जांच तब शुरू हुई जब विभिन्न विभागों, रजिस्ट्री कार्यालयों और वित्तीय संस्थानों से प्राप्त दस्तावेजों में उनकी आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया।
ACB ने अपनी जांच में न केवल महिमापत रे, बल्कि उनकी पत्नी हेमा बोर्कर, मां कुमकुर रे, और दोनों बच्चों के नाम दर्ज संपत्ति की जानकारी भी तलब की है। उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान किस स्त्रोत से जमीन, मकान, बैंक बैलेंस, निवेश और वाहन खरीदे।
सूत्रों के अनुसार, ACB टीम ने रांची, खूंटी और अन्य जिलों में स्थित उनके आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों का रिकॉर्ड इकट्ठा किया है। यह भी जांच की जा रही है कि उनकी आयकर रिटर्न (ITR), सर्विस सर्विस रिकॉर्ड और बैंक खातों में दर्ज रकम सरकारी सैलरी और वैध स्रोतों से मेल खाती है या नहीं।
जांच अधिकारी लिमिटेड समय में रिपोर्ट तैयार करेंगे। अगर रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाते हैं, तो FIR दर्ज कर केस को नियमित जांच (Regular Case) में बदल दिया जाएगा। इससे पहले भी महिमापत रे चर्चा में रहे हैं, जब रांची शहरी विकास योजनाओं और CSR फंड के उपयोग पर सवाल उठे थे। हालाँकि उस समय कोई केस दर्ज नहीं हुआ था।
इस मामले को महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
क्योंकि IAS अधिकारी राज्य प्रशासन का प्रमुख चेहरा होते हैं। यदि उन पर भ्रष्टाचार या बेनाम संपत्ति का आरोप लगता है तो यह व्यवस्था पर सीधा सवाल उठाता है। इसी कारण ACB इस केस को गंभीरता से देख रही है।
आगे क्या?
- ACB संपत्तियों का ‘Real Valuation’ करा सकती है।
- यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो मामला कोर्ट तक पहुँचेगा।
- सरकार IAS अधिकारियों की संपत्ति घोषणा व्यवस्था को और सख्त कर सकती है।
यह पूरी कार्रवाई अभी प्रारंभिक चरण में है। ACB ने आधिकारिक बयान में कहा है कि “जांच निष्पक्ष होगी और तथ्यों के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे।”



