डुमरी (गिरिडीह)।
अनुमंडल कार्यालय डुमरी में बाल विवाह की रोकथाम, समाज में फैली कुप्रथाओं के उन्मूलन और महिलाओं-बच्चियों के अधिकारों की सुरक्षा व सशक्तिकरण को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण-cum-कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यक्रम बाल विवाह मुक्त झारखंड, मिशन शक्ति और सामाजिक कुरीति निवारण योजनाओं के तहत आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त रामनिवास यादव ने किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य
- सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना
- बाल विवाह रोकने के कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना
- विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना
DC ने क्या कहा
उपायुक्त ने संबोधित करते हुए कहा कि—
- सरकारी योजनाओं और अधिकारों का लाभ मिलने से आज महिलाएँ अधिक सशक्त हुई हैं।
- आज महिलाएँ शिक्षा, रोजगार और हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि—
“समाज में अभी भी कई कुरीतियाँ मौजूद हैं, जिनमें बाल विवाह एक गंभीर समस्या है। इसे खत्म करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।”
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि—
- कम उम्र में बच्चों की शादी कराना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है
- हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है कि बाल विवाह का विरोध करे और जानकारी तुरंत प्रशासन को दे
शादी की जानकारी मिलते ही क्या करना होगा
यदि कहीं बाल विवाह की संभावना या सूचना मिले तो—
- तुरंत संबंधित पदाधिकारी / CMPO / पुलिस / अनुमंडल प्रशासन को बताना अनिवार्य है।
- जानकारी मिलते ही प्रशासन शादी रोककर, कानून के अनुसार कार्रवाई करेगा।
साथ ही पीड़ित बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।
जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम, 2015 के तहत सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया—
“बाल विवाह केवल सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि गंभीर अपराध है।
कई मामलों में आगे चलकर POCSO कानून के तहत दंडनीय अपराध भी बन जाता है।”
कार्यक्रम के अंत में सभी विभागों से अपील की गई कि—
- बाल विवाह रोकने के लिए एकजुट होकर अभियान चलाया जाए
- लोगों को जागरूक किया जाए
- किसी भी सूचना पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
