रांची– झारखंड में लैम्पस और पैक्स की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार पैसा देने की व्यवस्था में बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने पर लैम्पस, पैक्स और अन्य सहकारी संस्थाओं को अब को-ऑपरेटिव बैंक से सीधे 10-10 लाख रुपये का ऋण मिल सकेगा।
किसानों के विकास के लिए बदली जा रही व्यवस्था
किसानों के विकास के लिए ऋण की राशि लैम्पस और पैक्स को को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से दी जाएगी। ऋण की राशि राज्य सरकार बैंक को देगी। इसके लिए जल्द ही को-ऑपरेटिव बैंक और कृषि विभाग के बीच एमओयू होगा। कृषि विभाग ने इस प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की से मंजूरी दे दी है। अब आगे की कार्रवाई के लिए फाइल को राज्य योजना प्राधिकृत समिति को भेज दिया गया है।
1500 बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों को मिलेगा कैश क्रेडिट
इस योजना के तहत प्रथम चरण में वित्तीय वर्ष 2025-26 में कार्यशीलता के आधार पर कम्प्यूटरीकृत 1500 बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों को प्रति समिति 10 लाख रुपये कैश क्रेडिट लिमिट दी जाएगी। यदि किसी कार्यशील प्राथमिक सहकारी समिति को कैश क्रेडिट लिमिट लेने में दिक्कत हो, तो दूसरी बहुउद्देशीय समिति को यह सुविधा दी जाएगी।
लैम्पस-पैक्स की स्थिति बेहतर होगी, किसान होंगे सशक्त
इस नई व्यवस्था से राज्य में लैम्पस और पैक्स की स्थिति बेहतर होगी। ऋण पर खाद, बीज, कीटनाशक दवा आदि लेने वाले किसानों को काफी सहूलियत मिलेगी और वे सशक्त होंगे। पहले सहकारी समितियों को कार्यशील पूंजी और आधारभूत संरचना के लिए सीधे राज्यांश फंड दिया जाता था।
बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी
पिछले वर्षों में राज्य में निबंधित कुल 4554 लैम्पस और 77 व्यापार मंडलों में से अधिकांश कार्यशील नहीं थे। वर्ष 2023-24 में केवल 23 करोड़ 63 लाख रुपये कार्यशील पूंजी मद में उपलब्ध कराए गए थे। कार्यशील पूंजी का उपयोग खाद-बीज, कीटनाशक दवा, धान अधिप्राप्ति अथवा अन्य व्यवसायों के लिए रिवॉल्विंग फंड के रूप में किया जाना था, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा था।
राशि वसूली की पूरी जिम्मेदारी अब को-ऑपरेटिव बैंक की
राशि वसूली की पूरी जिम्मेदारी राज्य को-ऑपरेटिव बैंक की होगी। राज्य सरकार केवल उपलब्ध कराई गई ऋण राशि पर वित्तीय सहायता देगी, उसी की प्रतिपूर्ति करेगी। ऋण के रूप में जो राशि उपलब्ध कराई जाएगी, उसके एनपीए होने पर बैंकिंग प्रावधान के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। किसी भी परिस्थिति में एनपीए राशि की भरपाई राज्य सरकार नहीं करेगी।
