50 साल बाद इंसान फिर जाएगा चांद के करीब, मार्च 2026 में लॉन्च होगा NASA का Artemis-2 मिशन

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नई दिल्ली: नासा का आर्टेमिस-2 मिशन अंतरिक्ष इतिहास में नई शुरुआत माना जा रहा है। 1972 के अपोलो मिशन के बाद पहली बार इंसानों को चंद्रमा के पास भेजने की तैयारी है। करीब आधी सदी बाद इंसान फिर गहरे अंतरिक्ष में जाएगा।

आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत यह पहला मानवयुक्त मिशन होगा जो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर घुमाकर सुरक्षित वापस लाएगा। हालांकि यह मिशन चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं करेगा।

लॉन्च डेट बदली, अब मार्च 2026 में उड़ान

पहले इसकी लॉन्च तिथि 6 फरवरी 2026 तय थी, लेकिन हाइड्रोजन लीकेज की वजह से “वेट ड्रेस रिहर्सल” (लॉन्च से पहले की फुल टेस्टिंग) रोकनी पड़ी। इसी कारण मिशन की तारीख बढ़ाकर अब मार्च 2026 कर दी गई है।

वेट ड्रेस रिहर्सल में रॉकेट को असली लॉन्च जैसा ईंधन भरकर सभी सिस्टम चेक किए जाते हैं, ताकि उड़ान के समय कोई तकनीकी समस्या न हो।

कौन हैं आर्टेमिस-2 के चार अंतरिक्ष यात्री

आर्टेमिस-2 मिशन में चार सदस्यीय दल जाएगा:

  • कमांडर: रीड वाइजमैन (अमेरिका)
  • पायलट: विक्टर ग्लोवर (अमेरिका)
  • मिशन स्पेशलिस्ट: क्रिस्टीना कोच (अमेरिका)
  • मिशन स्पेशलिस्ट: जेरेमी हैनसन (कनाडा)

यह टीम NASA के ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट से उड़ान भरेगी।

चंद्रमा के चारों ओर उड़ान, लेकिन लैंडिंग नहीं

आर्टेमिस-2 की टीम चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेगी, लेकिन वहां लैंडिंग नहीं करेगी। यह मिशन मुख्य रूप से सिस्टम टेस्ट और डीप-स्पेस में मानव मिशन की तैयारी के लिए है।

कैसे होगी मिशन की उड़ान

लॉन्च के बाद:
SLS रॉकेट ओरियन स्पेसक्राफ्ट को ऊपरी ऑर्बिट में पहुंचाएगा।

पहले 24 घंटे:
टीम पृथ्वी की ऊंची कक्षा (करीब 70,000 किमी) में रहकर सभी लाइफ सपोर्ट और नेविगेशन सिस्टम की जांच करेगी।

ट्रांस-लूनर इंजेक्शन (TLI):
इसके बाद इंजन जलाकर यान को चंद्रमा की दिशा में भेजा जाएगा।

फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी:
यान चंद्रमा के पास से घूमकर “फिगर-8” जैसी कक्षा बनाते हुए स्वतः पृथ्वी की ओर लौटेगा। इसे फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी कहते हैं।

चंद्रमा के पास से गुजरना:
स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के फार साइड (पिछले हिस्से) से हजारों किलोमीटर की दूरी पर से गुजरेगा।

सुरक्षा की बड़ी परीक्षा

पृथ्वी पर लौटते समय ओरियन कैप्सूल की हीट शील्ड की बड़ी परीक्षा होगी।

  • एंट्री स्पीड: करीब 40,000 किमी/घंटा
  • तापमान: लगभग 2760°C तक

यह टेस्ट भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

बनाएगा नया रिकॉर्ड

रिपोर्ट के मुताबिक, यह मिशन अपोलो-13 से भी ज्यादा दूरी तक जाएगा। अपोलो-13 करीब 2.3 लाख मील दूर तक गया था। आर्टेमिस-2 उससे आगे जाकर नया रिकॉर्ड बना सकता है।

आगे क्या होगा

आर्टेमिस-2 को आर्टेमिस-1 की सफलता के बाद अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके बाद आर्टेमिस-3 मिशन में पहली महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने की योजना है।

आर्टेमिस कार्यक्रम को भविष्य के चंद्रमा बेस और मंगल मिशन की नींव के रूप में देखा जा रहा है।

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Pradeep Kumar is the Co-Founder of DumriExpress.com, a digital news platform. He extensively covers local news, latest updates, and trending stories, with a strong focus on Jharkhand and Bihar, along with National (Bharat), Politics, Technology, Sports, Entertainment, and International news.