नई दिल्ली |
- लग्जरी कारों पर बड़ा फैसला: 110% टैक्स घटकर 10% तक आएगा
- यूरोपीय शराब और Wine भी होंगी सस्ती
- कौन-कौन से प्रोडक्ट होंगे Tax Free या सस्ते
- PM मोदी बोले – यह सिर्फ व्यापार समझौता नहीं, साझा समृद्धि का रोडमैप
- EU नेताओं की प्रतिक्रिया
- भारत को क्या फायदे होंगे
- यूरोप को क्या मिलेगा
- किन सेक्टर्स को बाहर रखा गया
- 19 साल की कहानी: क्यों रुकी थी डील
भारत और European Union (EU) के बीच करीब 18 साल की लंबी बातचीत के बाद आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति बन गई है।
मंगलवार को 16वें भारत–EU समिट के दौरान इस ऐतिहासिक समझौते का आधिकारिक ऐलान किया गया।
इस डील को दुनिया भर में “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है, क्योंकि इससे भारत और यूरोप मिलकर करीब 200 करोड़ लोगों का साझा बाजार बनाएंगे, जो दुनिया की लगभग 25% GDP को कवर करेगा।
लग्जरी कारों पर बड़ा फैसला: 110% टैक्स घटकर 10% तक आएगा
FTA के तहत भारत ने यूरोप से आने वाली लग्जरी और प्रीमियम कारों पर लगने वाले भारी टैक्स को घटाने पर सहमति दी है।
- अभी तक BMW, Mercedes, Porsche जैसी कारों पर 110% तक इम्पोर्ट ड्यूटी लगती थी
- इसे स्टेप-बाय-स्टेप घटाकर 10% तक लाया जाएगा
- हालांकि इस छूट की सीमा तय की गई है
- हर साल सिर्फ 2.5 लाख कारों को ही इस कम टैक्स का फायदा मिलेगा
सरकार का मानना है कि इससे विदेशी कंपनियां भारत में ज्यादा मॉडल लॉन्च करेंगी और आगे चलकर मैन्युफैक्चरिंग व निवेश भी बढ़ेगा।
यूरोपीय शराब और Wine भी होंगी सस्ती
Free Trade Agreement (FTA) के बाद भारत में यूरोप से आने वाली शराब और वाइन भी सस्ती हो सकती हैं।
- यूरोपीय शराब पर अभी 150% टैरिफ लगता है
- इसे घटाकर 20–30% किया जाएगा
- बीयर पर टैक्स 110% से घटकर 50%
- स्पिरिट्स पर टैक्स करीब 40% रहेगा
इससे भारतीय बाजार में प्रीमियम विदेशी शराब की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।
कौन-कौन से प्रोडक्ट होंगे Tax Free या सस्ते
FTA के तहत कई अहम सेक्टर्स में टैक्स खत्म या बेहद कम किए जाएंगे:
- मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के करीब 90% प्रोडक्ट टैक्स-फ्री
- विमान और अंतरिक्ष से जुड़े लगभग सभी उत्पाद बिना टैरिफ
- मशीनरी पर 44% तक का टैक्स लगभग खत्म
- रसायनों पर 22% टैक्स में बड़ी कटौती
- जैतून का तेल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर शून्य टैक्स
PM मोदी बोले – यह सिर्फ व्यापार समझौता नहीं, साझा समृद्धि का रोडमैप
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इसे भारत–EU रिश्तों का नया अध्याय बताया।
उन्होंने कहा:
“यह केवल एक ट्रेड डील नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का रोडमैप है। इससे निवेश बढ़ेगा, नई इनोवेशन साझेदारियां बनेंगी और वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत होगी।”
PM मोदी ने यह भी बताया कि इस समझौते के तहत भारत और EU मिलकर IMEA कॉरिडोर को आगे बढ़ाएंगे और वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर भी सहयोग करेंगे।
EU नेताओं की प्रतिक्रिया
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने कहा:
हमने कर दिखाया। हमने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ डिलीवर की है।
यह समझौता दो महाशक्तियों की जीत है और इससे लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।”
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष Antonio Costa ने खुद को प्रवासी भारतीय बताते हुए कहा कि भारत और यूरोप का रिश्ता उनके लिए निजी भी है, खासकर उनकी गोवा से जुड़ी पहचान के कारण।
भारत को क्या फायदे होंगे
- भारतीय गारमेंट, लेदर और फुटवियर पर EU में लगने वाली 10% ड्यूटी कम या खत्म
- फार्मा और केमिकल सेक्टर का व्यापार 20–30% तक बढ़ने की संभावना
- डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में यूरोपीय निवेश
- कार्बन टैक्स से राहत, जिससे स्टील और एल्युमिनियम सेक्टर को फायदा
- भारत में यूरोपीय कारें, शराब और मशीनें सस्ती
यूरोप को क्या मिलेगा
- भारत जैसे बड़े बाजार में प्रीमियम कारों और शराब की आसान एंट्री
- IT, इंजीनियरिंग, टेलीकॉम और बिजनेस सर्विस सेक्टर में विस्तार
- चीन पर निर्भरता कम करने का मौका
- भारत में लॉन्ग-टर्म निवेश के नए अवसर
किन सेक्टर्स को बाहर रखा गया
- कृषि और डेयरी सेक्टर को FTA से बाहर रखा गया
- भारत को किसानों पर असर का डर
- EU भी अपने किसानों को लेकर सतर्क
19 साल की कहानी: क्यों रुकी थी डील
- बातचीत की शुरुआत 2007 में हुई
- 2013 में ठप पड़ी
- वजह:
- खेती और डेयरी खोलने पर मतभेद
- शराब और कारों पर टैक्स
- पेटेंट और पर्यावरण नियम
- 2021 में दोबारा बातचीत शुरू
- अब तक 14 राउंड मीटिंग्स
- 24 में से 20 चैप्टर फाइनल
भारत–EU FTA सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत करने वाला कदम है।
जहां एक तरफ विदेशी प्रोडक्ट सस्ते होंगे, वहीं दूसरी ओर भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजार में बड़ी पहुंच मिलेगी।
यह डील आने वाले वर्षों में भारत और यूरोप — दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
