दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए क्लाउड सीडिंग की गई, लेकिन बारिश नहीं हुई। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि बादलों की नमी और हवा का दबाव अनुकूल न होने के कारण प्रयोग सफल नहीं हो सका। जानें पूरी सच्चाई।
क्लाउड सीडिंग के बावजूद दिल्ली में नहीं बरसी बारिश
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से राहत दिलाने के उद्देश्य से क्लाउड सीडिंग की गई। चार घंटे तक चले इस वैज्ञानिक प्रयोग के बाद भी दिल्ली में बारिश नहीं हुई, जिससे लोगों में सवाल उठने लगे कि आखिर यह तकनीक सफल क्यों नहीं रही।
मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि क्लाउड सीडिंग कोई गारंटीड बारिश कराने की तकनीक नहीं, बल्कि यह एक ट्रिगर मैकेनिज्म है जो तभी काम करता है जब बादलों में पर्याप्त नमी और तापमान अनुकूल हो।
क्लाउड सीडिंग क्या है और कैसे होती है बारिश?
क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड और ड्राई आइस जैसे रसायनों को विमान के जरिए बादलों में छोड़ा जाता है। ये रसायन बादलों में मौजूद नमी को आकर्षित करके बर्फ के सूक्ष्म कण बनाते हैं, जो आपस में मिलकर भारी होकर बारिश के रूप में गिरते हैं।
बारिश क्यों नहीं हुई? वैज्ञानिकों ने बताई ये वजहें:
| कारण | विवरण |
|---|---|
| नमी की कमी | बादलों में पर्याप्त नमी उपलब्ध नहीं थी |
| अनुकूल तापमान नहीं | वातावरण का तापमान बारिश के लिए उपयुक्त स्तर पर नहीं पहुंचा |
| हवा की दिशा | तेज हवाओं ने बादलों को स्थिर नहीं रहने दिया |
| मौसमीय असंतुलन | वायुमंडल में दबाव का स्तर परिवर्तनशील रहा |
मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “क्लाउड सीडिंग तभी सफल होती है जब बादल पहले से विकसित अवस्था में हों। इस बार मौसम की स्थिति अनुकूल नहीं थी।”
क्या यह प्रयास विफल माना जाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयोग पूरी तरह विफल नहीं है। यह एक प्रयोगात्मक प्रक्रिया है और परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर भविष्य में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
क्या दुनिया में यह तकनीक सफल हुई है?
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): नियमित रूप से क्लाउड सीडिंग के जरिए बारिश कराता है
- चीन: ओलंपिक खेलों के दौरान मौसम नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया
- अमेरिका: कैलिफोर्निया में सूखे से राहत के लिए उपयोग किया गया
निष्कर्ष
दिल्ली में बारिश न होने का कारण तकनीक की कमी नहीं, बल्कि मौसम की अनुकूल स्थिति का अभाव था। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रयास भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण के एक महत्वपूर्ण समाधान के तौर पर उभर सकता है, बशर्ते मौसम का साथ मिले।
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