निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य में 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। आयोग के अनुसार, इस पुनरीक्षण का सबसे अधिक असर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र में देखा गया है।
- तीन राज्यों की संयुक्त मसौदा सूची जारी
- क्यों हटाए गए इतने बड़े पैमाने पर नाम
- मतदाता सूची से हटाए गए नामों का ब्योरा
- West Bengal में कुल मतदाता घटकर 7.08 करोड़
- इन विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नाम कटे
- राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा
- पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची में हुआ यह बड़ा बदलाव आगामी चुनावों पर सीधा असर डाल सकता है। आयोग का दावा है कि यह कदम फर्जी और अपात्र मतदाताओं को हटाकर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है, जबकि इसके राजनीतिक प्रभावों पर बहस अभी जारी है।
तीन राज्यों की संयुक्त मसौदा सूची जारी
निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल समेत तीन राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूची जारी की है। इसके तहत एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नामों में संशोधन या कटौती की गई है। केवल पश्चिम बंगाल में ही यह संख्या 58,20,898 तक पहुंच गई है।
क्यों हटाए गए इतने बड़े पैमाने पर नाम
आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के प्रमुख कारणों में—
- मतदाता का सत्यापन नहीं हो पाना
- पते पर मतदाता का नहीं मिलना
- स्थायी रूप से स्थानांतरित हो जाना
- मृत्यु के बाद नाम सूची में बने रहना
- एक ही व्यक्ति के नाम का दोबारा दर्ज होना
शामिल हैं। इन सभी कारणों के आधार पर नामों की छंटनी की गई।
मतदाता सूची से हटाए गए नामों का ब्योरा
जारी आंकड़ों के अनुसार—
- 24 लाख से अधिक मतदाता पते पर नहीं मिले
- 12 लाख से अधिक मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए
- 20 लाख नाम विभिन्न सत्यापन कारणों से हटाए गए
- 1.38 लाख नाम सूची में दोहराव के कारण काटे गए
West Bengal में कुल मतदाता घटकर 7.08 करोड़
एसआईआर अभियान के बाद पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की कुल संख्या घटकर 7.08 करोड़ रह गई है। इससे पहले यह संख्या 7.66 करोड़ थी। यानी राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या में करीब 58 लाख की कमी आई है।
इन विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नाम कटे
निर्वाचन आयोग की सूची के अनुसार, जिन विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक नाम हटाए गए, उनमें शामिल हैं—
- चौड़ी (कोलकाता) – 74,553 नाम
- कोलकाता पोर्ट – 63,730 नाम
- टोलीगंज – 35,309 नाम
- टॉलीगंज – 33,862 नाम
- उत्तर टॉलीगंज – 33,912 नाम
- खिदिरपुर – 25,478 नाम
इन क्षेत्रों में सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड से बाहर किए गए।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा
मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे सरकार और प्रशासन की विफलता बता रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया चुनावी पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थी।
