राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को त्वरित और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से झारखंड सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य के 49 स्थानों पर ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही पुराने ट्रॉमा सेंटरों को भी अपग्रेड किया जाएगा।
- राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर रहेगा विशेष फोकस
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सिविल सर्जनों को निर्देश
- बैठक में इन बड़े प्लान पर हुई चर्चा
- हर 100 किलोमीटर पर ट्रॉमा सेंटर का लक्ष्य
- टेली आईसीयू और मेडिकल कॉलेजों की जिम्मेदारी तय
- विधानसभा में उठा था ट्रॉमा सेंटर का मुद्दा
- 49 नए ट्रॉमा सेंटरों की शुरुआत झारखंड के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करेगी। इससे न सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कमी आएगी, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के लोगों को भी समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
यह बैठक स्वास्थ्य विभाग के नेपाल हाउस स्थित सचिवालय में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार सिंह ने की।
राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक में बताया गया कि ट्रॉमा सेंटर विशेष रूप से राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के दुर्घटना-संवेदनशील क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे, ताकि सड़क दुर्घटना होने की स्थिति में गोल्डन आवर (पहला एक घंटा) के भीतर पीड़ितों को जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा मिल सके।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सिविल सर्जनों को निर्देश
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ट्रॉमा सेंटरों का संचालन गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
बैठक में इन बड़े प्लान पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान कई अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें शामिल हैं—
- ब्लॉक और सीएचसी स्तर पर डॉक्टरों के कार्यों की समीक्षा
- सदर अस्पतालों में मॉड्यूलर ओटी निर्माण कार्य में तेजी
- ब्लड बैंक और एम्बुलेंस सेवाओं की समीक्षा
- मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना
- अस्पतालों में मशीनों की मैपिंग और आवश्यक उपकरणों की खरीद
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत हार्डवेयर और मैनपावर की स्थिति
हर 100 किलोमीटर पर ट्रॉमा सेंटर का लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग ने लक्ष्य तय किया है कि हर 100 किलोमीटर की दूरी पर कम से कम एक ट्रॉमा सेंटर उपलब्ध हो, जिससे आम जनता को समय पर इलाज मिल सके। इन ट्रॉमा सेंटरों में प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन, ब्लड बैंक, एंबुलेंस और आधुनिक लाइफ सेविंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी।
टेली आईसीयू और मेडिकल कॉलेजों की जिम्मेदारी तय
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि—
- चयनित स्थानों पर टेली आईसीयू की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी
- सदर अस्पतालों से संबद्ध मेडिकल कॉलेजों को टेली आईसीयू संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी
- जिला एवं डिविजनल अस्पतालों का पूर्व मूल्यांकन किया जाएगा
विधानसभा में उठा था ट्रॉमा सेंटर का मुद्दा
गौरतलब है कि शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा में भी ट्रॉमा सेंटर का मुद्दा उठा था। विधायक मनोज कुमार यादव ने बेरही अनुमंडल अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का मामला उठाया था, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में जवाब दिया था।
- 50 साल बाद इंसान फिर जाएगा चांद के करीब, मार्च 2026 में लॉन्च होगा NASA का Artemis-2 मिशन
- JMM के स्थापना दिवस पर धनबाद में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा बयान—75% स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देतीं तो कंपनियों पर कब्जा करें
- क्रिकेट के 73 नियमों में बड़ा बदलाव: बाउंड्री के बाहर से हवा में लिया कैच अब अमान्य
- शुरू हुआ वैवाहिक लग्न: जानें इस साल शादियों के लिए कब-कब हैं शुभ मुहूर्त
- झारखंड में बनेगा पूर्वी भारत का सबसे बड़ा AI Data Center, ₹3300 करोड़ निवेश से Digital हब बनेगा राज्य
