झारखंड की शान माने जाने वाले नेतरहाट आवासीय विद्यालय को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। विद्यालय समिति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उत्पन्न प्रशासनिक शून्य को देखते हुए हाईकोर्ट ने नई समिति के गठन तक अंतरिम संचालन समिति बनाने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विद्यालय समिति का कार्यकाल समाप्त, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
दरअसल, नेतरहाट आवासीय विद्यालय समिति (एनवीएस) का कार्यकाल 30 नवंबर 2025 को समाप्त हो चुका है। इसके बाद विद्यालय के संचालन और प्रशासन को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई थी। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लिया।
मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की पीठ ने कहा कि नेतरहाट स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का भविष्य किसी भी तरह की प्रशासनिक ढिलाई के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
नई समिति बनने तक अंतरिम समिति संभालेगी संचालन
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक नई स्थायी समिति का गठन नहीं हो जाता, तब तक एडहॉक यानी अंतरिम संचालन समिति विद्यालय का पूरा प्रबंधन संभालेगी। यह समिति स्कूल के शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की निगरानी करेगी।
अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम समिति का उद्देश्य केवल संचालन बनाए रखना नहीं, बल्कि विद्यालय की गुणवत्ता, अनुशासन और शैक्षणिक माहौल को मजबूत करना होना चाहिए।
पूर्व छात्रों की याचिका से जुड़ा है मामला
यह मामला नेतरहाट स्कूल के पूर्व छात्र केदार नाथ लालदास द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में विद्यालय की गिरती व्यवस्था, प्रशासनिक अनियमितताओं और प्रबंधन संकट का मुद्दा उठाया गया था।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि विद्यालय की गरिमा और शैक्षणिक स्तर को बनाए रखने के लिए तत्काल हस्तक्षेप किया जाए।
नेतरहाट की प्रतिष्ठा बचाने पर जोर
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नेतरहाट आवासीय विद्यालय केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि झारखंड की शैक्षणिक पहचान है। इसकी ऐतिहासिक और अकादमिक प्रतिष्ठा को बनाए रखना राज्य और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अब सभी की नजरें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह कितनी जल्दी नई समिति का गठन करती है और हाईकोर्ट के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करती है।
