केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में एक बड़ा सुधार करते हुए CoalSETU नीति को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। इस नीति के तहत कोयला लिंकज की नीलामी के लिए एक नया विंडो शुरू किया जाएगा, जिससे कोयले का पारदर्शी, प्रभावी और सुचारु उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
CoalSETU क्या है और क्यों लाई गई यह नीति
CoalSETU यानी Seamless, Efficient and Transparent Utilisation of Coal।
सरकार के अनुसार, यह नीति उद्योगों को कोयले की बेहतर उपलब्धता देने, कारोबार में आसानी बढ़ाने और आयातित कोयले पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से लाई गई है। CoalSETU विंडो के जरिए कोयला किसी भी औद्योगिक उपयोग और निर्यात के लिए नीलामी के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।
नॉन-रेगुलेटेड सेक्टर (NRS) के लिए नई व्यवस्था
CoalSETU विंडो को NRS (Non-Regulated Sector) Linkage Policy के तहत जोड़ा गया है। इसके तहत सीमेंट, स्टील (कोकिंग कोल को छोड़कर), स्पॉन्ज आयरन, एल्यूमिनियम और अन्य उद्योगों को कोयला नीलामी के जरिए मिलेगा। हालांकि, इस विंडो में कोकिंग कोल को शामिल नहीं किया गया है।
कोयले का उपयोग और निर्यात पर भी मिलेगी छूट
नई नीति के अनुसार, CoalSETU विंडो से प्राप्त कोयले का उपयोग स्वयं के उपभोग, कोयला धुलाई (coal washing) और निर्यात के लिए किया जा सकेगा। कोयला लिंकज धारक अपनी कुल लिंकज मात्रा का 50 प्रतिशत तक कोयला निर्यात कर सकेंगे। इससे देश में धुले हुए कोयले की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात में कमी आएगी।
ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को मिलेगा लाभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि CoalSETU नीति से
- Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलेगा
- घरेलू कोयले की उपलब्धता मजबूत होगी
- आयातित कोयले पर निर्भरता घटेगी
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी
सरकार का मानना है कि यह कदम कोयला क्षेत्र में चल रहे सुधारों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ” X(Twitter) ” के माध्यम से यह जानकारी दी

