ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया का सबसे सख्त डिजिटल सुरक्षा कानून लागू करते हुए 16 वर्ष से कम के बच्चों और किशोरों के लिए यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, एक्स (ट्विटर) और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
यह नया कानून 2024 के पार्लियामेंटरी रिसर्च के बाद तैयार किया गया, जिसमें पाया गया कि सोशल मीडिया बच्चों में मानसिक तनाव, गलत जानकारी, साइबर बुलिंग और स्क्रीन-एडिक्शन बढ़ा रहा है।
सरकार के अनुसार, यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने के लिए जरूरी था।
क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
ऑस्ट्रेलिया सरकार के अनुसार—
- सोशल मीडिया बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा था।
- साइबर बुलिंग के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही थी।
- प्लेटफॉर्म बच्चों का डेटा एकत्र कर गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे थे।
- स्क्रीन एडिक्शन और ऑनलाइन हिंसा जैसे मुद्दे सामने आ रहे थे।
इन्हीं कारणों से सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया।
कैसे लागू होगा नया नियम?
नए कानून के तहत—
- प्लेटफॉर्म को आयु सत्यापन सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाना होगा।
- 16 वर्ष से कम के बच्चों के अकाउंट कंपनियाँ खुद डीएक्टिवेट करेंगी।
- बच्चों द्वारा नियम तोड़ने पर परिवार या किशोर पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।
- सरकार एक नेशनल डिजिटल आइडेंटिटी सिस्टम के जरिये उम्र सत्यापन करेगी।
भारत का मॉडल अलग क्यों?
भारत में नियम थोड़ा अलग हैं।
- यहां 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया पर रहने के लिए माता-पिता की अनुमति आवश्यक है।
- भारत पूरी तरह बैन की बजाय पैरेंटल कंट्रोल और ऑनलाइन सुरक्षा फीचर्स पर जोर देता है।
ऑस्ट्रेलिया का मॉडल पूरी तरह प्रतिबंधात्मक है, जबकि भारत बच्चों को सुरक्षित रूप से ऑनलाइन रहने की अनुमति देता है।
