पलामू पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह पिछले तीन महीनों से सक्रिय था और इसकी कमान दुबई से बैठे ठग चला रहे थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया है और बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण, फर्जी अकाउंट और ठगी के दस्तावेज बरामद किए हैं।
दुबई से संचालित फर्जी गेमिंग रैकेट का खुलासा, झारखंड पुलिस ने 7 लोगों को किया गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार यह गिरोह हजारों लोगों को ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर जोड़ रहा था। आरोपी लोगों को ऐप डाउनलोड कराकर निवेश के नाम पर पैसे मंगवाते थे और बाद में उनका खाता ब्लॉक कर पैसे हड़प लेते थे। इस रैकेट में शामिल आरोपी रोजाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे थे।
कौन-कौन गिरफ्तार हुए?
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:
- शैलेन्द्र सिंह
- विपिन कुमार
- रंजीत कुमार
- अजीत कुमार
- राहुल कुमार
- सोनू यादव
- और एक अन्य आरोपी
सभी आरोपी झारखंड और बिहार के अलग-अलग जिलों से हैं। पुलिस ने इनके पास से 14 मोबाइल फोन, लैपटॉप, कई बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और फर्जी पहचान पत्र बरामद किए हैं।
कैसे चल रहा था ठगी का रैकेट?
- यह गिरोह दुबई बैठे मास्टरमाइंड के इशारे पर काम करता था।
- आरोपी टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से लोगों को जोड़ते थे।
- निवेश के नाम पर 5,000 से लेकर 3 लाख रुपये तक की रकम ले ली जाती थी।
- फिर खाते ब्लॉक कर पीड़ित से संपर्क बंद कर दिया जाता था।
- कुछ मामलों में पीड़ितों को ऐप में नकली बैलेंस भी दिखाया जाता था।
पुलिस ने बताया कि गिरोह के बैंक अकाउंट में पिछले तीन महीनों में लगभग 1 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। कई ट्रांजेक्शन अंतरराष्ट्रीय नंबरों से जुड़े मिले हैं।
पुलिस की कार्रवाई
पलामू एसपी ने बताया कि यह कार्रवाई साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने की है। पुलिस लगातार डिजिटल ट्रांजेक्शन और कॉल रिकॉर्ड की निगरानी कर रही थी।
सात लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
दुबई में बैठे मुख्य आरोपी की पहचान भी कर ली गई है, जिसके खिलाफ लुकआउट नोटिस की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान गेमिंग ऐप या निवेश योजना में पैसा न लगाएं।
राज्य में साइबर अपराधों पर पुलिस की सख्ती आगे भी जारी रहेगी।
