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तदाशा मिश्रा बनीं झारखंड की पहली महिला प्रभारी DGP

तदाशा मिश्रा को झारखंड का पहला महिला प्रभारी DGP नियुक्त किया गया। 1994 बैच की IPS अधिकारी, अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देंगी।

झारखंड पुलिस के इतिहास में पहली बार किसी महिला अधिकारी को राज्य पुलिस का नेतृत्व सौंपा गया है। राज्य सरकार ने 1994 बैच की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को प्रभारी पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया है। शासन ने औपचारिक आदेश जारी करते हुए कहा कि तदाशा मिश्रा फिलहाल अगले आदेश तक इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगी।

पूर्व DGP के सेवानिवृत्त होने के बाद यह पद खाली था। सरकार ने वरिष्ठता, अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए यह ज़िम्मेदारी तदाशा मिश्रा को दी है। उनकी नियुक्ति को राज्य में महिला सशक्तिकरण और पुलिस व्यवस्था में नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है।


तदाशा मिश्रा कौन हैं?

  • 1994 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी
  • इससे पहले गृह विभाग में विशेष सचिव के रूप में काम कर रही थीं
  • रांची, धनबाद, बोकारो जैसे जिलों में एसपी/एसएसपी रह चुकी हैं
  • अपराध अनुसंधान, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ऑपरेशन और पुलिस सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहीं

मुख्य प्राथमिकताएं (DGP के रूप में):

  1. कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाना — खासकर त्योहारों, चुनाव और भीड़ नियंत्रण के समय
  2. महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण — महिला हेल्पलाइन, शिकायत केंद्र और थाना-स्तर पर बेहतर सुविधा
  3. साइबर क्राइम की रोकथाम — ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया अपराध और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को बेहतर बनाना
  4. नक्सल व अपराध नियंत्रण — दहशतगर्द क्षेत्रों में समन्वित अभियान और आधुनिक तकनीक का उपयोग
  5. पुलिस सुधार — थानों में संवेदनशीलता बढ़ाना, जवानों की वेलफेयर पॉलिसी, तनाव प्रबंधन कार्यक्रम

ऐतिहासिक क्षण

झारखंड बना देश का वह राज्य जहां पहली बार एक महिला अधिकारी को DGP स्तर का दायित्व मिला।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने उनके नेतृत्व पर विश्वास जताया और उम्मीद की कि “झारखंड पुलिस नई ऊर्जा और संवेदनशीलता के साथ काम करेगी।”


जन प्रतिक्रिया

  • सोशल मीडिया पर “Congratulations Ma’am” ट्रेंड कर गया
  • महिला संगठनों ने इसे “गौरव का क्षण” बताया
  • युवाओं ने उम्मीद जताई कि पुलिस में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बढ़ेगी

यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संदेश देती है कि झारखंड में महिलाओं की भूमिका नेतृत्व तक पहुंच चुकी है।

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