रांची : झारखंड पूर्वी भारत का सबसे बड़ा Artificial Intelligence (AI) आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दावोस और यूके यात्रा के बाद राज्य को तकनीकी और डिजिटल हब के रूप में विकसित करने के लिए यह बड़ा प्रस्ताव मिला है। इससे झारखंड को डिजिटल हब और ग्रीन टेक्नोलॉजी स्टेट के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
सिंगापुर की एक ग्लोबल कंपनी ने झारखंड में अत्याधुनिक एआई आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार के साथ आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) साझा किया है। यह परियोजना राज्य में एआई निवेश, रोजगार सृजन और ग्रीन एनर्जी आधारित उद्योगों को गति देने वाली मानी जा रही है।
₹3300 करोड़ का निवेश, 1600 लोगों को रोजगार
परियोजना के तहत कंपनी लगभग 3300 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। डेटा सेंटर शुरू होने पर करीब 1600 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इससे डिजिटल विकास की रफ्तार तेज होगी और राज्य में टेक आधारित रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
24 महीनों में व्यावसायिक संचालन का लक्ष्य
परियोजना की समय-सीमा के अनुसार 24 महीनों में व्यावसायिक संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान भूमि चिन्हितकरण, आधारभूत संरचना विकास, बिजली आपूर्ति, कनेक्टिविटी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कंपनी ने 5 से 8 एकड़ भूमि की मांग की है। भूमि उपलब्ध होते ही निवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
10 MW बिजली की खपत, हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम
यह डेटा सेंटर लगातार 10 मेगावाट बिजली की खपत करेगा। इतनी बिजली से एक साथ हजारों हाई-पावर सर्वर, जीपीयू मशीनें और सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम चलाए जा सकेंगे।
यहां पारंपरिक सर्वर के बजाय जीपीयू क्लस्टर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, जिनका उपयोग बड़े एआई मॉडल, मशीन लर्निंग, इमेज प्रोसेसिंग, साइबर सिक्योरिटी और रिसर्च कार्यों में होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार AI आधारित डेटा सेंटर केवल भवन नहीं बल्कि डिजिटल फैक्ट्री होते हैं—जहां बिजली से डेटा चलता है, डेटा से एआई बनता है और एआई से अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलती है।
राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ताकत
इस परियोजना से झारखंड की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आईटी, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही स्टार्टअप और टेक कंपनियों को विश्वस्तरीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, जिससे राज्य में निवेश आकर्षित होगा।
यह डेटा सेंटर झारखंड को डिजिटल और तकनीकी मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
