नई दिल्ली।
नए साल की शुरुआत में सोने-चांदी के कीमतों में दिखी तेज़ी के बाद अब तेज गिरावट देखने को मिली है। जनवरी के अंत में महज दो कारोबारी सत्रों में आई भारी बिकवाली ने निवेशकों की कमाई का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया।
30 और 31 जनवरी के बीच 48 घंटों में बाजार में आए तेज Correction ने सोना-चांदी के Price चांदी 31.36% और सोना 13.14% नीचे गिर गया।
कीमतों में कितना गिरावट
- चांदी:
4,05,000 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर से 1,27,000 रुपये टूटकर 2,78,000 रुपये प्रति किलो पर आ गई।
यानी शिखर से 31.36% गिरावट। - सोना:
1,86,500 रुपये से 24,500 रुपये गिरकर 1,62,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
यानी करीब 13.14% गिरावट।
ऊंचे दाम पर खरीद करने वाले निवेशकों को तगड़ा झटका लगा।
गिरावट की प्रमुख वजहें
- फेड का सख्त रुख:
अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से कीमती धातुओं पर दबाव। - मजबूत डॉलर इंडेक्स:
डॉलर मजबूत होने पर सोना-चांदी की मांग कमजोर पड़ती है। - मार्जिन कॉल:
एक्सचेंज में ट्रेडिंग मार्जिन बढ़ने से बिकवाली तेज। - नया निवेश पैटर्न:
फेडरल रिजर्व की नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता। - प्रॉफिट बुकिंग:
ऊंचे स्तर पर बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
एक्सपर्ट का क्या राय है
Commodity एक्सपर्ट अजय केडिया के अनुसार, बाजार में मुनाफावसूली दिख रही है क्योंकि पिछले तीन सालों में सोना-चांदी ने जबरदस्त रिटर्न दिया। ऐसे में निवेशकों का ऊंचे भाव पर मुनाफा बुक करना स्वाभाविक है।
उनका कहना है कि गिरावट के दौरान भी एसआईपी के जरिए निवेश जारी रखा जा सकता है।
तीन साल की तेजी के बाद मुनाफावसूली
विश्लेषकों के मुताबिक, सोना-चांदी में करीब तीन साल से लगातार तेजी बनी हुई थी। अब बाजार में ‘प्रॉफिट कलेक्टिंग’ यानी मुनाफावसूली का दौर शुरू हुआ है।
हालांकि वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक हालात जैसे फैक्टर अब भी मौजूद हैं, इसलिए लंबी अवधि में निवेशक पूरी तरह बाहर नहीं जा रहे।
क्या करें निवेशक
- एसआईपी जारी रखें: गिरावट के दौरान किस्तों में निवेश बेहतर।
- किस्तों में निवेश करें: एकमुश्त निवेश से बचें।
- जल्दबाजी में न बेचें: बाजार स्थिर होने का इंतजार करें।
- लक्ष्य आधारित निवेश: लंबी अवधि के पोर्टफोलियो में ही रखें।
