Greenland Crisis: यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में शुरू किया ऑपरेशन आर्कटिक एडवांस

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यूरोप– ग्रीनलैंड को लेकर हालिया धमकियों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यूरोपीय देशों ने आर्कटिक क्षेत्र में “ऑपरेशन आर्कटिक एडवांस” की शुरुआत कर दी है। यह कदम नाटो देशों की सामूहिक तैयारी और रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है ऑपरेशन आर्कटिक एडवांस?

इस ऑपरेशन के तहत यूरोप के कई देशों ने ग्रीनलैंड क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है।

  • डेनमार्क की अगुवाई में यह अभ्यास किया जा रहा है
  • इसका उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा, निगरानी और आपसी तालमेल को मजबूत करना है

डेनमार्क ने अपनी 27वीं माउंटेन इन्फैंट्री ब्रिगेड के सैनिकों को तैनात किया है। हालांकि सैनिकों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार 35 से 40 यूरोपीय सैनिक पहले ही ग्रीनलैंड पहुंच चुके हैं।

कौन-कौन से देश शामिल हैं?

  • डेनमार्क
  • जर्मनी
  • नीदरलैंड
  • फ्रांस
  • नॉर्वे
  • स्वीडन
  • फिनलैंड

इन देशों ने स्पष्ट किया है कि यह अभ्यास रक्षात्मक प्रकृति का है और किसी देश के खिलाफ नहीं है।

पोलैंड और इटली ने क्यों दूरी बनाई?

पोलैंड, इटली और तुर्किये ने इस अभ्यास में सैनिक भेजने से इनकार कर दिया है।

  • पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि “यह आर्कटिक क्षेत्र है, यहां हर देश की अपनी सुरक्षा प्राथमिकताएं हैं।”

इससे यह साफ हुआ कि नाटो के भीतर भी सभी देश एक ही रणनीति पर नहीं हैं।

बड़े मिशन की तैयारी

  • डेनमार्क के लगभग 200 सैनिक पहले से ग्रीनलैंड में मौजूद हैं
  • 14 सदस्यीय “सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल” लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है
  • आने वाले दिनों में जर्मनी, फ्रांस और अन्य देशों की भागीदारी बढ़ सकती है

यह अभ्यास लंबे समय तक चलने वाला माना जा रहा है।

ट्रंप का बयान और नाटो पर दबाव

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर बयान देकर विवाद बढ़ा दिया था।

  • उन्होंने नाटो महासचिव को पत्र लिखकर कहा कि “यदि नाटो को शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया, तो शांति की जिम्मेदारी मेरी नहीं होगी।”

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका अब ग्रीनलैंड को लेकर अपने हितों पर सख्त रुख अपना सकता है।

राजनीतिक संदेश क्या है?

  • सैनिकों की संख्या भले कम हो
  • लेकिन संदेश राजनीतिक और रणनीतिक रूप से बड़ा है
  • यूरोप यह दिखाना चाहता है कि आर्कटिक क्षेत्र में उसकी उपस्थिति और संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा

ग्रीनलैंड को लेकर शुरू हुआ ऑपरेशन आर्कटिक एडवांस केवल सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह आर्कटिक क्षेत्र में बदलते शक्ति संतुलन का संकेत है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा नाटो, अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच संबंधों को और प्रभावित कर सकता है।

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Pradeep Kumar is the Co-Founder of DumriExpress.com, a digital news platform. He extensively covers local news, latest updates, and trending stories, with a strong focus on Jharkhand and Bihar, along with National (Bharat), Politics, Technology, Sports, Entertainment, and International news.