रांची |
Contents
- राज्य में 55% ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल से जल
- जल जीवन मिशन का जिला और पंचायत स्तर पर हाल
- योजनाओं और जल स्रोतों की स्थिति
- नल जल कनेक्शन की रफ्तार में गिरावट
- खर्च और फंड की स्थिति (करोड़ रुपये में)
- केंद्रांश की राशि नहीं मिलने से रुका काम
- झारखंड में जल जीवन मिशन ने कवरेज के स्तर पर भले ही 55 प्रतिशत तक पहुंच बनाई हो, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक सुस्ती के कारण योजना की गति थमती नजर आ रही है। यदि समय रहते केंद्रांश जारी नहीं हुआ, तो हर घर नल जल का लक्ष्य और पीछे खिसक सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना हर घर नल जल के तहत झारखंड में संचालित जल जीवन मिशन की प्रगति इस समय गंभीर स्थिति में है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के नौ महीने बीत जाने के बावजूद इस योजना पर अब तक एक रुपये का भी खर्च नहीं हो सका है।
राज्य में 55% ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल से जल
आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में कुल 62.53 लाख ग्रामीण परिवार हैं।
- 15 अगस्त 2019 तक केवल 3.45 लाख परिवार (6%) ही नल जल से जुड़े थे
- वर्तमान में 34.46 लाख परिवार (55%) तक नल से जल पहुंच चुका है
हालांकि, वित्तीय प्रगति की गति बेहद धीमी बनी हुई है।
जल जीवन मिशन का जिला और पंचायत स्तर पर हाल
- मिशन राज्य के 24 जिलों, 263 प्रखंडों, 4,296 पंचायतों और 29,404 गांवों में लागू है
- 195 पंचायतें और 4,862 गांव को अब तक हर घर जल घोषित किया गया है
- प्रमाणित (सर्टिफाइड) हर घर जल पंचायतों की संख्या 111 और गांवों की संख्या 3,129 है
- राज्य में 19 आकांक्षी जिले हैं, जहां कवरेज 56.41% है.
योजनाओं और जल स्रोतों की स्थिति
- राज्य की 97,535 योजनाओं में से 10.03% अभी भी जल स्रोत से लिंक नहीं हैं
- 1.12 लाख जल स्रोतों में से केवल 81.51% ही जियो-टैग हो सके हैं
- 341 स्कूलों में सिर्फ 52 में ही पेयजल की व्यवस्था है
- 122 गांव ऐसे हैं, जहां अब तक कोई पेयजल योजना नहीं है
- 202 परियोजनाएं विभिन्न स्वीकृतियों के कारण अटकी हुई हैं
- राज्य में 19 आकांक्षी जिले हैं, जहां कवरेज 56.41% है
- 5.39 लाख पीवीटीजी परिवारों में से केवल 53 प्रतिशत के पास ही नल जल कनेक्शन है
नल जल कनेक्शन की रफ्तार में गिरावट
- वर्ष 2023-24 में 13.95 लाख नल जल कनेक्शन दिए गए
- 2024-25 में यह घटकर 2.02 लाख रह गया
- 2025-26 में अब तक सिर्फ 15,823 कनेक्शन ही जोड़े जा सके हैं
खर्च और फंड की स्थिति (करोड़ रुपये में)
- 2019-20: 235.67
- 2020-21: 464.35
- 2021-22: 948.20
- 2022-23: 3,382.85
- 2023-24: 6,432.23
- 2024-25: 1,301.16
- 2025-26: 0.00
केंद्रांश की राशि नहीं मिलने से रुका काम
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक केंद्र सरकार से केंद्रांश की राशि नहीं मिली, जिस कारण राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि भी खर्च नहीं कर पा रही है।
उन्होंने कहा कि योजना को वर्ष 2028 तक विस्तारित किया गया है, लेकिन अभी प्रक्रिया लंबित है।
