Jamshedpur Police Custody Death: जीत महतो को अब तक नहीं मिला न्याय, विधायक जयराम महतो ने किया पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद

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रांची/जमशेदपुर।
जमशेदपुर के एमजीएम थाना क्षेत्र में 31 दिसंबर 2025 को पुलिस कस्टडी के दौरान 18 वर्षीय युवक जीत महतो की मौत के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उत्पन्न करता है कि आखिर कैसे पुलिस कस्टडी में 2 दिनों के अंदर जीत महतो की रहस्यमय स्थिति में मौत हो गई है। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस कस्टडी में होने वाली मौतों और पुलिस पर जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जीत महतो अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी और बेटे की अचानक मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि अब उनके सामने रोज़ी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

कौन था जीत महतो?

  • नाम: जीत महतो
  • आयु: 22 वर्ष
  • स्थानीय: गोकुलनगर, एमजीएम थाना क्षेत्र, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम)
  • यह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था।
  • उसकी पत्नी प्यारी महतो के घर 28 दिसंबर को ही नवजात बच्ची (बेटी) का जन्म हुआ था।

मौत कब और कैसे हुई?

  • पुलिस ने जीत महतो को 29 दिसंबर 2025 को मोबाइल चोरी के शक पर हिरासत में लिया था।
  • गिरफ्तारी के दौरान उसके स्वास्थ्य बिगड़ने की बात बताई गई।
  • अगले दिन यानी 30 दिसंबर को महतो को एमजीएम अस्पताल (MGM Medical College Hospital) ले जाया गया।
  • 31 दिसंबर 2025 को उसकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम में क्या पाया गया?

पुलिस व अस्पताल की रिपोर्ट में कहा गया है कि:

  • शव पर कोई बाहरी चोट या प्रताड़ना के निशान नहीं मिले।
  • ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर की रिपोर्ट में यह बताया गया कि मौत का कारण “जटिल सेरेब्रल मलेरिया” (complicated cerebral malaria) था।
  • पोस्टमार्टम एक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कराया गया।

पुलिस ने इस आधार पर निर्णय लिया कि यह प्राकृतिक मौत है, लेकिन विवाद अभी भी जारी है। क्योंकि आखिर कैसे 2 दिन में जीत महतो की रहस्यमय स्थिति में मौत हुई वो भी मलेरिया जैसे बीमारी को कारण बताया जा रहा है जो आज के समय में आसानी से उसका इलाज उपलब्ध है । ऐसे में पुलिस प्रशासन पर काफी ज्यादा गंभीर आरोप लगना तय है। आखिर कौन है इसका जिम्मेदार?

इस तरह से जनता का लगातार पुलिस प्रशासन भरोसा लगातार कम होता जा रहा है।

परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप

परिवार व स्थानीय निवासियों का आरोप है कि:

पुलिस हिरासत के दौरान उसे खाना–पानी नहीं दिया गया था
पुलिस हिरासत के कारण वो तेजी से बीमार पड़ा और जान गंवा बैठा
पोस्टमार्टम बहुत जल्दी कराया गया और बिना पारदर्शिता के अंतिम संस्कार भी हो गया।

परिवार की मांग है कि यह सिर्फ मलेरिया नहीं, बल्कि हिरासत में प्रताड़ना की वजह से मौत है।

क्या पुलिस ने कोई कार्रवाई की?

  • जिला पुलिस ने Principal District & Session Judge से न्यायिक जांच की मांग की है ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
  • पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट में गंभीर चोट नहीं है और मृत्यु के पीछे मलेरिया का स्पष्ट कारण लिखा गया है।

NHRC में शिकायत

मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज मिश्रा ने इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में मांग की गई है कि—

  • पीड़ित परिवार को उचित सरकारी मुआवजा दिया जाए
  • जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो
  • सभी थानों में थर्ड डिग्री पूछताछ पर रोक लगे
  • हर थाना परिसर में CCTV कैमरे अनिवार्य किए जाएं

अब तक जांच कहां तक पहुंची

NHRC द्वारा केस का रजिस्ट्रेशन इस बात का संकेत है कि आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए संज्ञान लिया है। सामान्य प्रक्रिया के तहत, आयोग संबंधित राज्य सरकार और पुलिस विभाग से विस्तृत रिपोर्ट (Action Taken Report) तलब करता है।


हालांकि, खबर लिखे जाने तक आयोग की ओर से अगला औपचारिक नोटिस या निर्देश सार्वजनिक नहीं किया गया है। फिलहाल मामला आयोग के पास जांच के प्रारंभिक चरण में है।

राजनीतिक–प्रशासनिक प्रतिक्रिया

इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया और दबाव भी बढ़ा है:

  • BJP सांसद विद्युत बरन महतो ने इसे कस्टडी में हत्या करार दिया और कहा कि जांच होना चाहिए।
  • सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि जब पारिवारिक सदस्य को ₹2 लाख की सहायता दी गई, तो वह मामला दुरुपयोग है या न्याय?
  • पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा सहित कई नेताओं ने केस की उच्चस्तरीय जांच और अनुभवी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
  • परिवार की मां पूजा महतो और पत्नी प्यारी महतो उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।

हिरासत में मौतें और सिस्टम पर सवाल

यह मामला सिर्फ जीत महतो तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड में पुलिस हिरासत, पूछताछ की प्रक्रिया और मानवाधिकारों की सुरक्षा पर फिर से गंभीर सवाल खड़े करता है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जब तक ऐसी घटनाओं में जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक व्यवस्था पर भरोसा बहाल होना मुश्किल है।


अब सबकी नजरें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि जीत महतो की मौत के मामले में दोषियों की जिम्मेदारी तय हो पाएगी या नहीं।

परिवार की स्थिति अब

  • नवजात बच्ची के पालन–पोषण की चिंता अब परिवार पर भारी है।
  • परिवार न्याय, नौकरी और बरसाती मुआवज़ा की मांग कर रहा है, क्योंकि जीत महतो परिवार का एकमात्र कमाने वाला था।

जनता, राजनीतिक दलों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा न्यायिक जांच की मांग तक पहँच चुका है।
पुलिस का कहना है कि मौत के पीछे मलेरिया जिम्मेदार है।
परिवार व समर्थकों का आरोप है कि पुलिस की हिरासत के दौरान मिली हुई बेरहमी से पिटाई और प्रताड़ना मौत का कारण बनी।

विधायक जयराम कुमार महतो ने बढ़ाया मदद का हाथ

डुमरी से विधायक Jairam Kumar Mahato ने घटना के बाद पीड़ित परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जीत महतो के परिजनों को मदद का वादा पहले ही किया जा चुका था, जिसे निभाते हुए उन्होंने अपने निजी वेतन से 75 प्रतिशत राशि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहयोग के रूप में दी है।

विधायक ने कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल जीत महतो के घर पहुंचकर यह सहायता सौंप चुका है और श्राद्ध कर्म के दौरान राशन समेत अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

विधायक जयराम कुमार महतो ने इस मामले में अब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बावजूद अब तक जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कदम क्यों नहीं उठाए गए हैं।

उन्होंने साफ कहा कि न्याय दिलाने के लिए पार्टी स्तर पर आंदोलन जारी रहेगा और इस मामले को दबने नहीं दिया जाएगा।

आखिर झारखंड में कब रुकेगी पुलिस प्रताड़ना?

विधायक ने इस घटना को सिस्टम पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताते हुए कहा कि पुलिस प्रताड़ना से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर झारखंड में पुलिस कस्टडी में मौतों का सिलसिला कब थमेगा।

विधायक जयराम कुमार महतो ने कहा

विधायक जयराम कुमार महतो ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि वे हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार का सवाल नहीं, बल्कि पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।

घटना के बाद से इलाके में गुस्से और शोक का माहौल है, वहीं पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

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Pradeep Kumar is the Co-Founder of DumriExpress.com, a digital news platform. He extensively covers local news, latest updates, and trending stories, with a strong focus on Jharkhand and Bihar, along with National (Bharat), Politics, Technology, Sports, Entertainment, and International news.