रांची/धनबाद।
झारखंड की प्रतिभाओं को पहचान और सम्मान दिलाने की बातें भले ही सरकार और प्रशासन के मंचों पर की जाती हों, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी इससे कोसों दूर नज़र आती है। इसका ताज़ा उदाहरण धनबाद (बलियापुर) की रहने वाली होनहार खिलाड़ी अनु कुमारी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और राज्य का नाम रोशन किया, लेकिन आज आर्थिक तंगी और इलाज के अभाव में संघर्ष कर रही हैं।
झारखंड के डुमरी से विधायक जयराम कुमार महतो ने इस पूरे मामले को सार्वजनिक करते हुए राज्य की खेल व्यवस्था और सरकारी उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीता कांस्य पदक
अनु कुमारी ने वर्ष 2024 में चीन में आयोजित वर्ल्ड लेज़र रन/पेंटाथलॉन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारत और झारखंड का गौरव बढ़ाया था। इसके अलावा वह 38वें नेशनल गेम्स में भी कांस्य पदक जीत चुकी हैं। इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद, उन्हें अब तक वह सहयोग नहीं मिल पाया जिसकी वह हकदार थीं।
सरकारी वादे कागज़ों तक सीमित
नेशनल गेम्स में पदक जीतने के बाद राज्य सरकार की ओर से ₹5 लाख की प्रोत्साहन राशि और स्पोर्ट्स कोटा से सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई थी। लेकिन कई महीनों बाद भी न तो पूरी सहायता मिली और न ही नौकरी को लेकर कोई ठोस पहल सामने आई।
अनु कुमारी ने खेल मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक आवेदन देकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल पाया है। यह स्थिति राज्य की खेल नीति और उसके क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
चोट और इलाज ने बढ़ाई मुश्किल
वर्तमान में अनु कुमारी पैर में गंभीर चोट के कारण खेल से दूर हैं। इलाज के लिए 16 जनवरी को दिल्ली जाना प्रस्तावित है, लेकिन आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि इलाज और खेल उपकरण जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
विधायक जयराम महतो ने बढ़ाया हाथ
विधायक जयराम कुमार महतो ने व्यक्तिगत स्तर पर हस्तक्षेप करते हुए दूसरी बार अपने निजी वेतन से आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने न सिर्फ इलाज बल्कि खेल किट और आवश्यक संसाधनों के लिए भी सहयोग किया।
उन्होंने कहा कि
“आर्थिक संकट की वजह से किसी खिलाड़ी की प्रतिभा दबनी नहीं चाहिए। झारखंड की पहचान खेलों से बने, यही हमारा प्रयास है।”
राज्य की खेल व्यवस्था पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है। झारखंड में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं और सरकारी सहयोग से वंचित हैं। खेल प्रतिभाओं का भविष्य अक्सर आर्थिक कमजोरी, इलाज के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ जाता है।
क्या बदलेगी तस्वीर?
विधायक महतो ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे भी जहां ज़रूरत होगी, वह खिलाड़ियों के साथ खड़े रहेंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार और खेल विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, या फिर झारखंड की प्रतिभाएं यूं ही संघर्ष करती रहेंगी?
अनु कुमारी आज सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि राज्य की खेल व्यवस्था की सच्चाई का प्रतीक बन चुकी हैं।
