रांची (झारखंड):
रांची में धुर्वा थाना क्षेत्र से 2 जनवरी 2026 को लापता हुए दो मासूम बच्चे — अंश कुमार राय और अंशिका कुमारी — अब तक नहीं मिले हैं। कई दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस सुराग सामने नहीं आने से पूरे शहर में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है।
लापता बच्चों की अभी तक कोई खबर न होने के कारण भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
मंगलवार को रांची में भाजपा रांची महानगर एवं ग्रामीण पूर्वी-पश्चिमी जिला इकाइयों के संयुक्त आह्वान पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एसएसपी कार्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया।

कौन हैं लापता बच्चे और कहां से हुए गायब?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार—
- बच्चा: अंश कुमार राय
- बच्ची: अंशिका कुमारी
- पिता का नाम: सुनील कुमार राय
- लापता होने की तारीख: 2 जनवरी 2026
- लापता होने का स्थान: धुर्वा थाना क्षेत्र, रांची
- वर्तमान पता: मल्लार कोचा, नियर जगन्नाथपुर मंदिर, रांची
- स्थायी पता: ग्राम हल्दी, छपरा बदल टोला, थाना मनेर, जिला पटना (बिहार)
परिवार का कहना है कि बच्चों के लापता होने के बाद पुलिस को तत्काल सूचना दी गई, लेकिन शुरुआती दिनों में जांच की रफ्तार बेहद धीमी रही थी।
BJP का आरोप
प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि—
- इतने संवेदनशील मामले में रांची पुलिस की कार्यप्रणाली बेहद लापरवाह रही
- कई दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया
- इससे आम लोगों में भय और असुरक्षा की भावना तेजी से बढ़ रही है
भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, और बच्चों की शीघ्र सुरक्षित ढूंढने और परिवार को जल्द से जल्द सौंपने की मांग की है।
वही कुछ निर्दलीय राजनीतिक विश्लेषक लोगों का मानना है कि अगर बीजेपी सत्ता में होती तो भी कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता इसलिए चाहे वह पुलिस प्रशासन हो जनता हो या पक्ष-विपक्ष पार्टियां हो , या उनके प्रतिनिधि या जनप्रतिनिधि हो. चाहे वह राज्य का वर्तमान सरकार ही क्यों ना हो … सभी से निवेदन है की इन दोनों बच्चों को जल्द से जल्द खोजा जाए। और सुरक्षित उनके माता-पिता को सौंपा जाए।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा
प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र किया जाएगा। भाजपा का कहना है कि यह सिर्फ दो बच्चों का मामला नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की कानून-व्यवस्था का यही हाल है।
अभी कुछ समय पहले ही धनबाद में अस्पताल से बच्चा चोरी का मामला लोगों के ज़ेहन से उतरा नहीं था और अब ये मामला सामने आया है,उस मामले में भी शुरुआती जांच पर सवाल उठे थे।
इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या झारखंड में बच्चों की सुरक्षा संकट में है?
क्या मानव तस्करी या संगठित गिरोह सक्रिय हैं?
और क्या पुलिस के पास इनसे निपटने की कोई ठोस रणनीति नहीं है?
झारखंड में बढ़ती घटनाएं
राज्य में बीते कुछ वर्षों में—
- लापता बच्चों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है
- CCTV, साइबर मॉनिटरिंग और अंतर-जिला समन्वय में कमजोरी
जैसी समस्याएं लगातार सामने आती रही हैं। बावजूद इसके, अब तक कोई राज्य-स्तरीय प्रभावी नीति ज़मीन पर उतरती नहीं दिख रही।
कुछ सवाल है सिस्टम से?
- लापता बच्चों की तलाश में अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए?
- शुरुआती 48 घंटे में जांच कितनी प्रभावी रही?
- क्या राज्य में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई विशेष टास्क फोर्स सक्रिय है?
- धनबाद जैसी घटनाओं से सबक क्यों नहीं लिया गया?
अंश कुमार राय और अंशिका कुमारी का मामला अब सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं रहा, बल्कि झारखंड की कानून-व्यवस्था, पुलिस की तत्परता और सरकार की संवेदनशीलता पर सीधा सवाल बन चुका है।
जब तक बच्चे सुरक्षित नहीं मिलते, तब तक यह मामला राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा बना रहेगा।
अब देखते है आखिर कब तक पुलिस प्रशासन और झारखंड सरकार इन बच्चों को ढूंढ के , बच्चे के परिजन को सौंपते है।
