रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम पर कार्यरत इंजीनियर आकाशदीप गुप्ता का लखनऊ के आलमबाग स्थित आवास में अचानक निधन हो गया। मंगलवार को वे अपने घर में बेहोश पाए गए, जिसके बाद उन्हें लोकबंधु अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्राथमिक जांच में हृदय गति रुकने (Cardiac Arrest) को मौत का कारण बताया जा रहा है। हालांकि, अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है और अभी तक किसी तरह की साजिश या बाहरी हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं हुई है।

क्यों बढ़ी चिंता?
🔸 आकाशदीप की सिर्फ 6 महीने पहले शादी हुई थी और परिवार का दावा है कि उन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं थी।
🔸 वे भारत की सबसे अत्याधुनिक मिसाइल ब्रह्मोस पर एक अहम परियोजना में कार्यरत थे।
🔸 पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौतों के कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते यह घटना भी चर्चा में है।
पुलिस व प्रशासनिक कार्रवाई
लखनऊ पुलिस ने मामले को “प्राथमिक रूप से प्राकृतिक मृत्यु” बताया है।
FSL (Forensic Lab) रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक जांच जारी रखने की बात कही गई है।
किसी प्रकार की राजनीतिक अथवा सुरक्षा एंगल को फिलहाल खारिज नहीं किया गया है।
DRDO और राष्ट्र के लिए क्षति
आकाशदीप गुप्ता देश के उन चुनिंदा युवा इंजीनियरों में से थे, जिन्होंने भारत की मिसाइल क्षमता को उन्नत करने में योगदान दिया। उनकी अचानक मौत से DRDO वैज्ञानिक समुदाय और राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों में शोक और चिंता दोनों का माहौल है।
परिवार का बयान
परिजनों के अनुसार:
“आकाश एक्टिव और हेल्दी थे। उन्हें कोई बीमारी नहीं थी। उनका जाना हम सबके लिए सदमे जैसा है। हमें निष्पक्ष जांच चाहिए।”
सोशल मीडिया प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं और #JusticeForAkashdeep तथा #DRDOScientist जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
निष्कर्ष
आकाशदीप गुप्ता की मौत सिर्फ एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि देश की रक्षा वैज्ञानिक प्रणाली के लिए एक बड़ा झटका है।
मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता जरूरी है, ताकि ऐसे संवेदनशील पदों पर नियुक्त अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
Dumri Express की अपील
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