रांची। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की मासिक जीएसटी रिपोर्ट के अनुसार
झारखंड ने दिसंबर 2025 तक जीएसटी संग्रह में बिहार को 7,650 करोड़ रुपये से पीछे छोड़ दिया।
रिपोर्ट बताती है कि राज्य में तेज़ी से बढ़ रही
औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों का सीधा असर
कर राजस्व पर दिखाई दे रहा है।
झारखंड में जीएसटी संग्रह में तेज़ बढ़ोतरी
दिसंबर 2025 में झारखंड का जीएसटी संग्रह
राष्ट्रीय औसत से 9% अधिक दर्ज किया गया,
जबकि बिहार में इसी अवधि में 7% की गिरावट दर्ज की गई।
यानी, झारखंड ने तेज़ गति से वृद्धि दिखाई,
जबकि बिहार का संग्रह घटा।
करदाताओं की संख्या में बिहार ज्यादा, फिर भी राजस्व में झारखंड आगे
रिपोर्ट के अनुसार—
- बिहार में जीएसटी पंजीकृत करदाताओं की संख्या लगभग 6.68 लाख
- झारखंड में लगभग 2.24 लाख (बिहार से लगभग तीन गुना कम)
फिर भी राजस्व में झारखंड आगे निकल गया —
यह दर्शाता है कि झारखंड में:
बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ
बेहतर कर-अनुपालन
मजबूत कारोबारी गतिविधियाँ
—निरंतर बढ़ रही हैं।
कुल जीएसटी संग्रह — झारखंड का प्रदर्शन मजबूत
रिपोर्ट बताती है कि झारखंड का कुल जीएसटी संग्रह
बिहार की तुलना में काफी ज्यादा रहा।
झारखंड ने:
₹21,965 करोड़ से अधिक राजस्व अर्जित किया,
जबकि
बिहार इससे ₹7,650 करोड़ कम रहा।
व्यापार–उद्योग और उपभोग में सुधार
जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी के साथ—
- व्यापार और बाजार गतिविधियाँ मजबूत हुईं
- औद्योगिक उत्पादन में तेजी आई
- निर्माण, सेवा और उपभोग क्षेत्र में सुधार दिखा
- ग्रामीण–शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक आवाजाही बढ़ी
विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में बढ़ता कर-अनुपालन और कारोबारी विस्तार
भविष्य में राज्य की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेगा।
“यदि यही रफ्तार जारी रही,
तो झारखंड जीएसटी संग्रह में
अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा।”
